खबर पक्की: 1 जुलाई रतलाम, इस बार पार्षद और महापौर के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बागियों ने बड़ी तादाद में नामांकन दाखिल किए थे और सभी का आरोप था कि योग्यता को दरकिनार कर इस बार टिकट की रेवड़ी बांटी गई। लगता है बागियों के यह आरोप कुछ मामलों में सही है। वार्ड नंबर 36 की उम्मीदवार सुष्मिता राजेश माहेश्वरी के पति का मामला भी कुछ ऐसा ही है। उन्होंने रतलाम में ड्रग इंस्पेक्टर रहे राजेंद्र सिंह परिहार की पत्नी शकुंतला से चेक के माध्यम से ₹200000 उधार लिए थे। और पत्नी के ऋण अदायगी के स्वरूप 2011 में 1,1 लाख के दो चेक दिए थे 29 दिसंबर 2011 को अनादरीत हो गए। जिस पर राजेंद्र सिंह द्वारा केस दायर किया गया और निचली अदालत ने ₹339000 देने के आदेश देते हुए और वाद व्यय के ₹10000 अलग से देने का आदेश देते हुए6 महीने की जेल की सजा सुनाई। इस पर अभियुक्त राजेश महेश्वरी द्वारा जिला सत्र न्यायालय में अपील की गई। अपील में 19वें विद्वान सत्र न्यायाधीश ओम प्रकाश रजक द्वारा निचली अदालत के फैसले को स्थिर रखते हुए अभियुक्तों को ₹339000 प्रतिकार राशि और वाद व्यय ₹10000 प्रथक से अदा करने का आदेश दिया और साथ में 6 माह का कारावास की सजा सुनाई।

