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प्रहलाद पटेल का नाम घोषित, कहीं खुशी कहीं गम, रोते रोते हंसना सीखो, हंसते हंसते रोना जितनी चाबी भरी राम ने उतना चले खिलोना

BySurendra Jain

Jun 15, 2022

खबर पक्की :15 जून रतलाम, निकाय चुनाव की घोषणा होने के बाद भाजपा से महापौर प्रत्याशी के लिए अशोक पोरवाल, प्रवीण सोनी, प्रह्लाद पटेल, दिनेश राठौर के नाम दौड़ में थे। बीच-बीच में नीलेश पटेल, गुस्ताद अंकलेसरिया, अनीता कटारिया, प्रह्लाद राठौड़, राजेंद्र पाटीदार, अशोक पाटीदार, मोहन मुरली वाला के नाम भी चले। एक राष्ट्रीय अखबार ने 3 दिन पहले बगैर पार्टी के अधिकृत घोषणा के अशोक पोरवाल का नाम फाइनल बता कर पार्टी की तरफ से घोषित प्रत्याशी बता दिया जिससे सभी स्थानीय नेता खफा हो गए और उनकी दावेदारी की भ्रूण हत्या करवा दी। और इसी के चलते 3 दिन तक रस्साकशी चलती रही और अंततः प्रहलाद पटेल का नाम आज घोषित किया गया। अशोक पोरवाल के लिए कैलाश विजयवर्गीय गॉडफादर की तरह लगे हुए थे। वही राजेंद्र पाटीदार के लिए सांसद महोदय ने खूब मशक्कत की। दिनेश राठौर भी प्रदेश अध्यक्ष व अन्य सोर्स से टिकट के लिए प्रयास करते रहे। अशोक पाटीदार, नीलेश पटेल उस्ताद अंकलेसरिया मोहन मुरली वाला दशरथ पाटीदार के नाम संघ कोटे से उछलते रहे। सभी जानते हैं कि प्रवीण सोनी के सांसद प्रभात झा से घनिष्ट रहे है पर चूंकि प्रभात झा के सितारे खुद गर्दिश में है इसीलिए उनका नाम आखरी दौर तक चल जाना आश्चर्यजनक है। चयन समिति के लिए पार्टी मुख्यालय से जो मापदंड आए थे और चयन समिति ने जो जिलों से फीडबैक मंगाए थे अब वह फीडबैक जनता के सामने रखना चाहिए ताकि जनता को भी पता चल सके कि उसके द्वारा क्या फीडबैक दिया गया था और चयन समिति के चयन का आधार क्या रहा। यह सब व्यर्थ की कवायद है पर क्या करें मजा सभी को इसी में आता है। 3 दिन पहले अखबार में नाम छपने से जिस प्रत्याशी को सभी जिले भर से बधाइयां दे रहे थे आज उस पर क्या गुजर रही है वही जानता होगा। और नाम छपने से जिन के होश उड़ गए थे आज उनको टिकट मिलने पर उनकी और उनको टिकट दिलाने वाले की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं है। इसी प्रकार बाकी लोगों के नाम कट गए उनके और उनके समर्थकों के नैराश्य का भी आप अंदाजा लगा सकते हैं। प्रह्लाद पटेल के पार्षद का कार्यकाल तो लोगों ने देख लिया पिछले बार वे भारी बहुमत से जीते थे अब महापौर चुनाव मैं वह उनके वार्ड से पिछली बार से ज्यादा बहुमत से जीतते हैं तो यह माना जाना चाहिए कि पार्टी का निर्णय सही है। और महापौर के रूप में भी व करिश्मा दिखायेंगे। लेकिन अगर उनके वार्ड से उन्हें कम लीड मिलती है फिर भी शहर की जनता होने महापौर बना देती है तो उन्हें कमर कस के जनता का विश्वास जीतना चाहिए और पार्टी के निर्णय को और अपने आप को सही साबित करना चाहिए।

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