खबर पक्की : 15 मई रतलाम, अभी तक आपने पढ़ा कि कैसे रतलाम कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने युद्ध स्तर पर कोरोना को काबू में करने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया था टीकाकरण अभियान के तरीकों को लेकर पूर्व पार्षद सीमा टाक से भी उनकी झड़प हुई थी बाद में अवैध कब्जे दारो और भू माफियाओं के खिलाफ मुहिम छेड़ी और कैसे जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज कर दना दन दना दन मीडिया के माध्यम से तमाम विकास योजनाओं की पब्लिसिटी अपने माध्यम से की। यही कारण रहा कि जनप्रतिनिधियों और भाजपा संगठन की नाराजगी धीरे-धीरे अपना रंग दिखाने लगी। सागोद रोड पर प्रभारी मंत्री के आश्वासन के बावजूद रवि मोठ्या के कॉटेज को ढहाने की कार्रवाई और फिर बाद में भोपाल से फोन आने के बाद कार्रवाई को अधूरा छोड़ देना स्पष्ट तया सरकार और प्रशासन में समन्वय के अभाव को बता रहा था। इसी प्रकार पक्के भाजपाई सटोरिए पप्पू सेक्सी के लिए भाजपा नेताओं को स्पष्ट आश्वासन देने के बाद भी जिला बदर की कार्रवाई कर देना उनकी मनमर्जियां को उजागर कर रहा था। इसी प्रकार अमृत योजना में सरकार की तरफ से लगाए गए 5 ब्लॉकों के स्वास्थ्य शिविर में सरकार विरोधी जयेस नेता डॉ अभय ओहरि के खुद के नर्सिंग होम में स्वास्थ्य शिविर लगाने की मंजूरी देना और उसके लिए ₹100000 का आवंटन दिलवाना भी भाजपा संगठन के लोगों को नाराज करने के लिए काफी था और इसकी भी शिकायत संगठन में ऊपर तक पहुंची। तारीफ की बात की सरकार की योजना और सरकार का स्वास्थ्य शिविर लेकिन प्रचार डॉक्टर द्वारा खुद का और खुद के ईस्टीट्यूशन का किया गया जिसमें ना तो सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान का फोटो ना किसी भाजपा नेता का फोटो डॉक्टर द्वारा खुद का फोटो होर्डिंग में लगाया गया यही नहीं स्वास्थ्य शिविर के लिए ब्लॉक में कार्यरत डॉक्टरो से पांच पांच हजार रुपया भी मांगे गए जो कई डॉक्टरों द्वारा मजबूरी में दिए गए। जिले में इस प्रकार के अनेकों कार्यवाही की गई जिस कारण भाजपा नेता और संगठनों में कलेक्टर के प्रति अविश्वास बढ़ता गया क्योंकि कई जगह कलेक्टर द्वारा आश्वस्त करने के बाद भी उन आश्वासनों का खुलेआम मखौल उड़ाया गया। इससे संगठन के लोग और जनप्रतिनिधियों को लगा कि अपनी ही सरकार में इस तरह अपनी वाजिब बातों के लिए कलेक्टर के आगे गिड़गिड़ाना और उसके बाद भी उन पर कोई असर नहीं होना धीरे-धीरे ऐसा माहौल बना रहे थे और दोनों में रस्साकशी चल रही थी कि कौन सुपर और इसमें तू डाल डाल मैं पात पात का शह और मात का खेल चल रहा था। शहर में आयुष योजना के अंतर्गत तीन क्लीनिक खोलने का प्रत्येक का 25 25 लाख का बजट आया किसी भी जनप्रतिनिधि को मालूम नहीं कलेक्टर द्वारा स्वयं 2 आयुष क्लिनिक मोमिनपुरा और एक ईश्वर नगर के लिए मंजूर कर दिया गया। जब नगर निगम द्वारा इसके लिए टेंडर जारी किए गए तो संगठन और भाजपा विधायक में खलबली मची उन्होंने पता किया तो नगर निगम ने बताया कि यह तो स्वास्थ्य विभाग का काम है और स्वास्थ्य विभाग नगर निगम से करवा रहा है इसलिए टेंडर जारी किए नगर विधायक ने स्वास्थ्य विभाग से जानकारी निकाली तो पता चला कि सारे आर्डर कलेक्टर के यहां से जारी हुए। इस पर उन्होंने कमिश्नर और कलेक्टर से बात की और कहा कि शहर में आयुष क्लीनिक कहां बनना है सब आप ही तय कर लोगे तो फिर हम क्या करेंगे विधायक चैतन्य कश्यप ने बताया कि मोमिनपुरा से 300 मीटर की दूरी पर जिला चिकित्सालय है तो वहां आयुष क्लीनिक में कौन जाएगा लेकिन कलेक्टर ठहरे कलेक्टर फिर ऊपर का वरद हस्त और उनकी इसी तरह की हठधर्मिता ने उनके तबादले की पटकथा लिखना प्रारंभ कर दिया था। आगे की कहानी इनसाइड स्टोरी भाग 3 में।


