खबर पक्की, 29 अप्रैल, रतलाम। शुक्रवार कनेरी रोड पर प्रख्यात भागवत भूषण, अंतरराष्ट्रीय श्री शिव पुराण कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारविंद से रतलाम के पावन धरा पर किया जा रहा है। शिव महापुराण का आयोजन अरविंद पाटीदार स्मृति में रविंद् कल्याणी पाटीदार परिवार द्वारा किया जा रहा है। पं. प्रदीप मिश्रा के आने के पूर्व ही पांडाल श्रद्धालुओं से पूरा खचाखच भरा हुआ था ऐसा लग रहा था कि जैसे मिनी कुंभ हो पंडित प्रदीप मिश्रा के आते ही सर्वप्रथम महाकाल के चित्र का पूजन किया गया तत्पश्चात एकलिंग जी का पूजन करने के पश्चात व्यास पीठ को व श्रद्धालुओं को प्रणाम करते हुए व्यासपीठ पर आसीन हुए। पंडित मिश्रा का स्वागत रविंद्र पाटीदार व कल्याणी पाटीदार परिवार द्वारा व्यासपीठ का पूजन किया गया व मिश्रा जी से आशीर्वाद लिया गया। मुख्य अतिथि जावरा विधायक राजेंद्र पांडे रहे। पंडित जी ने अपने प्रवचन में कहा कि आज वैशाख की शिवरात्रि है जिस जिस ने भी जल चढ़ाएं हैं उसकी 3 महीने में मनोकामना पूर्ण हो जाएगी और जिस तरीके से मेरे पास में अन्य लेटर है उसी तरह से रतलाम वालों तुम्हारा भी पत्र आएगा कि मेरा काम हो गया है। भगवान कृष्ण के बीच कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने भगवान शिव का प्रत्येक पत्नी के साथ 11 दिन तक अभिषेक किया तो भगवान शिव प्रसन्न हुए उन्होंने आशीर्वाद स्वरुप प्रत्येक पत्नी से 11 संतान का आशीर्वाद दिया।शुरू के प्रारंभ में जो चीज मिलते हैं उसकी कद्र करो और उसके जैसी दूसरी कोई चीज नहीं होती इसका उदाहरण देते हुए बताया कि तुम साड़ी की दुकान पर जाओ दुकानदार शुरू में जो चार साड़ी दिखाएगा। उसके बाद में तुमको सो साड़ी 200 साड़ी 250 साड़ी भी दिखा देगा परंतु तुमको शुरू की चार साड़ी में ही पसंद आएगी। शिव महापुराण की कथा सुनने का सौभाग्य बाबा महादेव की कृपा से ही प्राप्त होता है और रतलाम वासियों को हुआ है। केवल मानव शरीर ही ऐसा है जिससे हम भगवान की सेवा कर सकते हैं पूजा कर सकते हैं चाकरी कर सकते हैं। अन्य किसी योनि में अन्य किसी और ने ने पूजन नहीं कर सकते पूजन करने के लिए केवल एक मानव देह ही है। कलिकाल में केवल नाम की ही आधारशिला है। उस नाम में कितना जा रहे हो। शिव महापुराण एक कुआं है एक बावड़ी है इस कुएं में भक्ति की रस्सी से विश्वास की बाल्टी से जीव कुछ ना कुछ प्राप्त करके आता है।
विश्वास भरोसा के कुएं में जाओगे तो कुछ अच्छा ही प्राप्त करोगे। तुम्हारी इच्छा यह नहीं होनी चाहिए कि मैं महाराज से मिली तुम्हारी इच्छा होना चाहिए एक बार मेरे शिव से मेरे शंभू से मिलने एक बार अगर मिल लो तो बहुत सारे दुखों का एक ही हल एक लोटा जल बहुत है। तुम अगर शिव का द्वार नहीं छोड़ोगे तो वह तुम्हारा साथ नहीं छोड़ेगा यह शिव पुराण कहती है। जाति का विभाजन कभी परमात्मा ने नहीं करा। हमारा सनातन धर्म कभी भी जाति मे नहीं बटा। दूसरे में बुराई देखना सरल है और अपने में मूल बुराई देखना बहुत कठिन हम अपने भीतर भी तो ढूंढे कथा में पहले भी कहा आज भी कहते हैं लाल चश्मा लगाओगे तो सब लाल दिखेगा और काला चश्मा लगाओगे तो सब काला दिखेगा आपकी आंखों मे चश्मा चढ़ा होगा वही आपको दिखेगा। अगर भजन करने वाला है तो उसको सब जगह भजन करने वाला ही दिखेगा।तुममे अगर तलब उठे कि मुझे शिव से मिलना है भगवान से मिलना है तो वह निश्चित ही मिल जाएंगे। धन्यवाद रतलाम की किस तरह कैसे सेवा कर रहे हैं रतलाम के लोग संस्था समाज आदि को नमन है दंडवत प्रणाम करता हूं। अजब गजब नजारा है रतलाम का। मेरा विश्वास करता है एक बड़ा से बड़ा व्यापारी इस सेवा के प्रकल्प में खड़ा होगा और छोटे से छोटा सेवक भी कम से कम पानी पिलाने में खड़ा होगा ऐसा मेरा विश्वास है। शिव महापुराण की भक्ति में जो तप गया वह सुंदर बन जाएगा और जो रह गया,वह रह गया।
अंत में आरती रविंद्र पाटीदार कल्याणी पाटीदार द्वारा की गई। इसमें रविंद्र पाटीदार, कल्याणी पाटीदार, मनीष पाटीदार, निमिष व्यास, अशोक पोरवाल, प्रदीप उपाध्याय, कन्हैयालाल मौर्य, मुन्ना शर्मा, अनिल झालानी, जनक नागल, जगदीश पहलवान, सतीश राठौड़, राजकुमार धबाई, जितेंद्र परमार, नरेन्द्र सिंह चौहान, मनोज सेन, शांतिलाल गोयल, सुभाष कुमावत, श्रीमती मंगला देवडा, श्रीमती सोना शर्मा, प्रकाश कुमावत आदि समिति सदस्य उपस्थित थे।

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