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रतलाम महाराजा द्वारा 1946 मैं संपादित रतलाम आइस फैक्ट्री का 8 पेज का लीज पट्टा

BySurendra Jain

Apr 11, 2022

खबर पक्की : 11 अप्रैल रतलाम, खबर पक्की के पाठकों को बता दें कि हमने 17 फरवरी को खबर प्रकाशित की थी की दूषित दस्तावेजों के आधार पर संपन्न रजिस्ट्री भी दूषित ही मानी जाएगी। और बताया था कि रतलाम आइस फैक्ट्री कि जो रजिस्ट्री संपादित हुई है वह उक्त पुरानी पावती के आधार पर ही संपादित हुई है।50978 नंबर कि उक्त पावती 1970 में बनी थी और उस पर स्पष्ट रूप से शासकीय पट्टेदार दर्ज था। और अपना पूरा घटनाक्रम बताते हुए बताया था कि कैसे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रेवेन्यू अधिकारियों की मिलीभगत से पट्टेदार एक के बाद एक सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ता हुआ। बगैर मेरिट पर जाए अपने पक्ष में फैसले लेता गया। इस खबर में हमने यह भी लिखा था की अगली खबर में हम पट्टे का प्रकाशन करेंगे। चूंकि हमने बहुत कोशिश की कि पट्टे की प्रमाणित प्रतिलिपि रजिस्ट्रार ऑफिस से मिल जाए पर हमारी अथक कोशिशों के बावजूद वह कापी हमें नहीं मिल पा रही है। किंतु पट्टे की कापी छापने में देरी की वजह से क्रेता और विक्रेता ने हमारे पाठकों और प्रॉपर्टी बाजार में यह अफवाह फैलाना शुरू कर दी की खबर पक्की को डरा दिया गया है या खरीद लिया गया है और अब इसमें रतलाम आइस फैक्ट्री से संबंधित कोई खबर नहीं छपेगी। इसलिए हमें मजबूरन प्रमाणित प्रति का इंतजार ना करते हुए विक्रेता द्वारा स्पाइरल बाइंडिंग में विक्रय हेतु बाजार में दिए गए दस्तावेजों को ही आधार बनाते हुए उसमें लगाए हुए पट्टे की कॉपी हम यहां ज्यों का त्यों छाप रहे हैं 26 दिसंबर 1946 को रतलाम महाराजा द्वारा संपादित इस पट्टे में पट्टे की समस्त शर्तों का खुलासा है 8 पेज के पट्टे में स्पष्ट लिखा हुआ है कि शर्तों का उल्लंघन होने पर उक्त लीज भूमि स्वयं शासन में वेष्ठित हो जावेगी। मात्र ₹180 प्रति साल में उद्योग लगाने के लिए लिज पर प्राप्त भूमि को किस शातिराना तरीके से मिलीभगत से हड़पा गया। और बेशकीमती 125 करोड़ की शासकीय जमीन को करोड़ों में खरीद कर अरबों रुपए बनाया जा रहा है इसकी मिसाल रतलाम में आपको दूसरे नहीं मिलेगी। खबर पक्की के पाठकों को स्पष्ट कर दें कि खबर पक्की को ना कोई खरीद सकता है ना डरा सकता है ना झुका सकता है खबर पक्की सच्चाई की राह पर चलता है और चलता रहेगा क्योंकि उसके साथ उसके हजारों पाठकों का विश्वास जुड़ा है। पाठकों का विश्वास ही हमारी पूंजी है और इससे हम समझौता नहीं कर सकते।

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