खबर पक्की :11 अप्रैल रतलाम, संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 में क्रमशः अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए की गई अखिल भारतीय राज्यवार आरक्षण एवं संरक्षण के लिए राष्ट्रपति सूची जारी करते हैं। ऐसे सूचियां सर्वप्रथम सन 1950 में जारी हुई लेकिन राष्ट्रपति ने जब यह सूची जारी की तब धर्मा स्थिति साईओ मुसलमान को sc में शामिल नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जनजातियों की सूची में उक्त दोनों वर्गों के धर्मान्तरित लोगों को सूची से बाहर नहीं करके एसटी की सूची में शामिल रखा गया। मूल रूप से यह भारी विसंगति है। यहां यह जान लेना उचित होगा कि धर्मांतरित लोग इंडियन क्रिश्चियन कहलाते हैं जो कि कानूनन अल्पसंख्यक कि श्रेणी में आते हैं इस प्रकार धर्मांतरित ईसाई और मुस्लिम दोहरी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं जहां वह अपने मूल जाति का लाभ ले रहे हैं वहीं धर्मांतरण के बावजूद वह अल्पसंख्यक होने का लाभ भी ले रहा है। उक्त बात जनजाति सुरक्षा मंच मध्य प्रदेश के पदाधिकारी डॉक्टर रूपचंद मईड़ा व दीपक निनामा ने रतलाम प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताई। उन्होंने बताया कि पांच परसेंट धर्मांतरण करने वाले 62% मूल जाति के आरक्षण को खा जाते हैं और इस कारण हमने जनजागृति फैलाने और कानून में बदलाव के लिए सड़क से संसद तक एवं सरपंच से सांसद तक आंदोलन एवं संघर्ष अभियान चलाने का निश्चय किया है। उन्होंने कहा कि जब तक कानून में बदलाव कर धर्मांतरण करने वाले लोगों को आरक्षण से वंचित नहीं किया जाता तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा और इसके लिए हम 1 मई को 50000 की तादाद में रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
