खबर पक्की :17 फरवरी रतलाम, जैसे-जैसे विकास हो रहा है और जमीन की कीमतें और प्रॉपर्टी के भाव में उछाला आ रहा है वैसे वैसे लोगों की नियत खराब होती जा रही है व धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे है। इसे तरह का एक मामला ग्राम नामली में सामने आया है । पंथ पिपलोदा में रहने वाली दुर्गा बाई की धामनोद पंचेड़ रोड पर सर्वे नंबर 336 व अन्य सर्वे नंबर की जमीन रकबा 10 बीघा का सौदा बसंती लाल पिता नागु कुमावत से किया गया था और ₹100000 लिए थे बसंती लाल की मृत्यु हो जाने पर उसके पुत्र धर्मेंद्र पिता बसंती लाल कुमावत से पुनः नया अनुबंध पत्र 12 अगस्त 2020 को किया और उससे ₹230000 लिए। मामला राजस्व न्यायालय में लंबित होने से उसका निपटारा और नामांतरण होने पर रजिस्ट्री कराने की शर्त तय हुई थी। यह भी तय हुआ था कि राजस्व न्यायालय में निपटारे का सारा खर्च धर्मेंद्र करेगा। धर्मेंद्र ने तहसील न्यायालय में वकील खड़ा कर काफी पैसा खर्च किया और नामांतरण करवा कर पावती बनवाने के आदेश करवाएं। क्योंकि पावती जमीन मालिक को ही दी जाती है अतः उसने जमीन मालिक व अनुबंध कर्ता दुर्गाबाई को कहा कि जमीन की पावती बन गई है तहसील से आकर प्राप्त कर ले और रजिस्ट्री करवाने की तैयारी करें। पर दुर्गाबाई ने धर्मेंद्र को रजिस्ट्री ना करवाते हुए बद नियति आने पर रजिस्ट्री राधेश्याम पिता गिरधारी जाट वह बंकट को करवा दी । राधेश्याम ने यह जानते हुए के पूर्व में उक्त सौदा धर्मेंद्र कुमावत का किया हुआ है उसके बावजूद दिनांक 3 नौ 2021 को रजिस्ट्री करवा ली। यही नहीं उसने चूंकि मालूम था यह सौदा धर्मेंद्र कुमावत का है उसने चालाकी करते हुए धर्मेंद्र के भाई देवेंद्र पिता बसंती लाल को पैसे का लालच देकर रजिस्ट्री में गवाह बना लिया ताकि धर्मेंद्र अपने भाई के खिलाफ नहीं जा सके और एक अन्य गवाह बंकट पिता शंकरलाल कुमावत को बनाया। थाना नामली में दुर्गाबाई राधेश्याम जाट देवेंद्र पिता बसंतीलाल और बंकट पिता शंकर लाल कुमावत के खिलाफ धारा 420 में कायमी की गई है। यहां एक बात उल्लेखनीय है कि धर्मेंद्र कुमावत थाना नामली के कई चक्कर लगाकर थक गया था किंतु एफ आई आर नहीं लिखी जा रही थी अंततः नए पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी को जनता सुनवाई में आवेदन दिया गया और पूरा मामला बताया गया एसपी साहब ने तुरंत थाना नामली को निर्देशित किया गया और उन्हें की पहल पर थाना नामली को एफ आई आर दर्ज करना पड़ीं। पुलिस अधीक्षक के इस पहल से जिले के सभी थाना प्रभारियों को सबक लेना चाहिए कि थाने में आई शिकायतों की गंभीरता से जांच कर उन पर तुरंत एफ आई आर दर्ज कर कार्रवाई करें। ताकि थाने में आए पीड़ितों को तुरंत राहत मिल सके और अनावश्यक रूप से एसपी साहब तक ऐसे प्रकरणों मैं पीड़ितों को न आना पड़े। तभी थाना प्रभारी और थाने की उपादेयता साबित हो पाएगी।

