खबर पक्की : 11 नवंबर रतलाम,आज कनेरी रोड पर जिस तरह से 25 मध्यम वर्गीय भूखंड मालिकों पर जिन्होंने भूखंड खरीदने पर सरकार को स्टांप ड्यूटी चुकाई फिर उसका बकायदा राजस्व विभाग में नामांतरण करवाया राजस्व विभाग ने उनका नामांतरण किया और प्रत्येक भूखंड मालिक को एक एक पावती पर दस दस हजार रुपया अनाधिकृत रूप से चुकाने पड़े सब काम नियम और कानून के दायरे में हुआ अब उन भूखंड मालिकों ने अपनी सुविधा के लिए सड़क का निर्माण किया और पारिवारिक सुविधा और छुट्टियों को इंजॉय करने के लिए 500, 700, फिट का कॉटेज बनाया जिसे आज प्रशासन ने अवैध घोषित कर तोड़ दिया और कंक्रीट के सड़कों को उखाड़ दिया। उनके फेंसिंग और पौधों को भी उखाड़ दिया हरे भरे लानों की मिट्टी पलीत कर दी प्रशासन की कार्रवाई देख कर ऐसा लग रहा था जैसे यह 25 भूखंड धारी टेक्स चुकाने वाले सम्मानित नागरिक ना होकर हिस्ट्रीशीटर नामजद गुंडे हो या आतंकवादी हो जिनको नेस्तनाबूद करने का आदेश दिया गया हो। प्रशासन की इस कार्रवाई को यदि मिसाल मानकर पूरे शहर पर लागू किया गया तो रतलाम शहर को कंक्रीट का कब्रिस्तान बनते देर नहीं लगेगी फिर तो बाजना बस स्टैंड से लेकर बीबड़ोद तक सैकड़ों हेक्टेयर में जितने कॉटेज बने हुए जितनी कंक्रीट की सड़कें बनी हुई है सब अवैध है सबको टूटना चाहिए। जावरा रोड पर डोसी गांव के पहले पेट्रोल पंप के सामने बगैर किसी परमिशन टीएनसी डायवर्सन के अवैध प्लाटिंग की गई है सब टूटना चाहिए इसी तरह माहेश्वरी प्रोटींस और नगरा रोड पर ढेरों जगह अवैध प्लाटिंग और कंक्रीट के रोड़ है सब टूटना चाहिए करण जी रोड पर भी पेट्रोल पंप के सामने अवैध दो मंजिला शॉपिंग मार्केट बनाया गया है जो ना तो टाउन कंट्री प्लानिंग से पास है और ना डायवर्सन है सब अवैध है लेकिन उस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसी तरह इप्का लेबोरेटरी के पास ग्रीन बेल्ट पर बना हुआ होटल भी है जिसकी कई बार कंप्लेंट हुई थी लेकिन प्रशासन ने पूर्व में उस को ना तोड़ते हुए बगैर टाउन कंट्री प्लानिंग की परमिशन के उसको नियमित कर दिया और डायवर्सन कर दिया। एक तरफ राज्य सरकार अवैध कॉलोनियों को वैध कर रही है एम ओ एस की लिमिट बढ़ाकर अवैध निर्माण को वेध किया जा रहा है। दूसरी तरफ आम जनता के सभी तरह के टैक्स चुकाने के बाद खून पसीने के निर्माणों को इस तरह ध्वस्त किया जा रहा है मानो वे आतंकवादी हो। जिले के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से लग रहा है जैसे उनको काठ मार गया हो जावरा विधायक राजेंद्र पांडे जो कलेक्टर को रतलाम लाने का श्रेय ले रहे थे क्या वह कलेक्टर के इन सब कार्यों के प्रति अपनी सहमति व्यक्त कर रहे हैं। इसी प्रकार रतलाम के विकास पुरुष का दर्जा प्राप्त कर चुके विधायक चैतन्य कश्यप की इस विध्वंस और विनाश पर चैतन्यता कब जागृत होगी जनता इंतजार कर रही है। रतलाम ग्रामीण के विधायक को तो मानो जनता से कुछ लेना देना नहीं है। सैलाना और आलोट के विधायक कुछ बोलते तो है पर विपक्षी विधायक होने से उनकी कोई सुनता नहीं है। रतलाम की मुर्दा हो चुकी जनता जो फिजूल के मुद्दों पर हजारों की तादाद में इकठ्ठी हो जाती है ऐसा लगता है जैसे यहां के लोगों का जन्म नेकी कर जूते खा के लिए ही हुआ है कोरोना काल में 68 दिन के lock-down में पेट भरने के लिए सरकार नहीं थी यहां के लोगों ने ही गरीब जनता का पेट भरा उसके बाद 2021 के लॉकडाउन में फिर जनता ने हीं जनता का पेट भरा और साफे जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन को पहना दिए। सीएसपी के अत्याचार पर उसके तबादले के लिए दो बत्ती थाने पर धरना देने वाले और और सागोद रोड पर लोगों के मकान तोड़ने पर और हर ज्वलंत मुद्दे पर अपनी ही सरकार और प्रशासन को घेरने वाले हिम्मत कोठारी की हिम्मत का भी लोगों को इंतजार है कि कब वह मैदान में आएंगे और हिम्मत दिखाएंगे या अपने जीते जी रतलाम शहर को कंक्रीट का कब्रिस्तान बनता देखेंगे। आश्चर्य की बात यह है कि भाजपा को भर पल्ले बहुमत देने वाली रतलाम शहर विधायक को 40 हजार से ज्यादा वोटों से जीताने वाली दिनभर राज और रागहिंदुत्व का गान करने वाली सरकार में ज्यादातर हिंदू बहुसंख्यक इलाकों में ही यह कार्रवाई हो रही है और वोटर अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहा है जो आने वाले नगर निगम चुनाव में बहुत भारी पड़ सकता है।

