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T & C कहा नियमानुसार किया था लेआउट मंजूर। निगम और नजूल ने निरस्त किया इसलिए हम भी करते हैं। हाई कोर्ट में तुरुप का पत्ता साबित हो सकता है आदेश

BySurendra Jain

Oct 27, 2021

खबर पक्की: 27 अक्टूबर रतलाम, रतलाम नगर निगम द्वारा कलेक्टर के आदेश के पालन में निर्माण अनुमति निरस्त किए जाने के बाद व नजूल द्वारा नजूल एनओसी निरस्त करने के पश्चात कल कलेक्टर द्वारा दी गई समय सीमा 15 दिन में निर्णय लेते हुए नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा द्वारका रेजिडेंसी को जारी लेआउट स्वीकृति को नगर निगम द्वारा जारी निर्माण अनुमति निरस्त किए जाने व नजुल द्वारा एनओसी निरस्त करने के प्रकाश में वैधानिक प्रश्न उत्पन्न होने के कारण लेआउट स्वीकृति को निरस्त कर दिया गया। लेकिन 3 पेज के निरस्ती आदेश पत्र में 13 बिंदुओं में बिंदुवार बताया गया कि नजूल के अस्तित्व में आने के पूर्व ही उक्त भूमि पर शासकीय रास्ता था। यह नहीं रतलाम सरकार द्वारा रतलाम सुधार न्यास के माध्यम से आवंटित भूखंड में भी आवंटन पत्र दिनांक 6 नवंबर 1959 मैं चर्तु सीमा द्वारा पूर्व दिशा में रास्ता ही बताया गया है। यह कि उक्त भूमि विक्रेता मंदसौर कलेक्टर पी एस तोमर द्वारा भी उक्त विक्रय पत्र के पंजीयन में पूर्व दिशा में आने जाने वालों का स्वत्व तत्पश्चात सज्जन मिल रोड बताया है जो पंजीकृत दस्तावेजों में सबूत के तौर पर आज भी मौजूद है। नजूल विभाग द्वारा बनाए गए पंचनामा दिनांक 27 December अट्ठारह का भी उल्लेख इसमें किया गया है जिसकी चर्तु सीमा में नगर सुधार न्यास के भूखंड पश्चात सैलाना रोड ही बताया गया है। जिसे आगे नजूल तहसीलदार द्वारा पारित आदेश दिनांक 28 दिसंबर 2018 में भी उल्लेखित किया गया है और पूर्व दिशा में रास्ते को मान्य किया गया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र 11 नवंबर 2018 में भी रोड सेंटर से 52 52 फीट छोड़कर निर्माण अनुमति दी गई है जिससे जाहिर होता है कि उक्त भूमि रास्ते के उपयोग की ही है। इसी प्रकार अनुविभागीय अधिकारी द्वारा जिलाधीश रतलाम को प्रेषित प्रतिवेदन दिनांक 10 अक्टूबर 19 में उक्त 15276 वर्ग फ़ीट भूमि को रास्ते के उपयोग हेतु बताया गया है। इसी प्रतिवेदन के आधार पर जिला कलेक्टर रतलाम द्वारा राजस्व सचिव को भेजी गई जानकारी में उक्त भूमि को रास्ते के उपयोग हेतु निर्धारित किया गया। टाउन कंट्री प्लानिंग ने अपने आदेश में यह भी बताया कि प्रचलित मास्टर प्लान में उक्त सड़क की चौड़ाई 30 मीटर है ब्रिज की चौड़ाई 15 मीटर के बाद दोनों तरफ साडे 7 मीटर साडे 7 मीटर की सर्विस रोड की जमीन है। साथ ही यह भी बताया कि प्रस्तावित मास्टर प्लान में उक्त सड़क की चौड़ाई 36 मीटर कर दी गई है। अर्थात ब्रिज की चौड़ाई 15 मीटर के बाद दोनों तरफ 11 मीटर सर्विस रोड हेतु भूमि को रखा जाना है जिसे नकारा नहीं जा उसके पश्चात मात्र 3 मीटर भूमि बचती है। आगे यह भी बताया गया कि सांसद प्रतिनिधि राजीव रावत की शिकायत में निगम के सभी इंजीनियर ने माना कि उक्त प्रोजेक्ट में लेश मात्र का भी अतिक्रमण नहीं है और उक्त भूमि सड़क की ही है। यह भी उल्लेख किया गया के उक्त जमीन पर पूर्व से ही आयल मिल स्थापित था और रास्ता उपलब्ध होने की वजह से ही आयल मिल को स्थापित करने की परमिशन दी गई थी। इस प्रकार बहुत होशियारी से नगर एवं ग्रामीण निवेश विभाग ने यह सिद्ध कर दिया कि उसके द्वारा जारी लेआउट अनुमोदन में कहीं कोई गलती नहीं थी और समस्त दस्तावेजों को परखने के उपरांत ही उसने नियमानुसार लेआउट स्वीकृत किया था। लेकिन चूंकि नगर निगम रतलाम द्वारा कलेक्टर के आदेश के प्रकाश में निर्माण अनुमति निरस्त की जा चुकी है और नजूल विभाग द्वारा अपनी जारी अनापत्ति को निरस्त कर दिया गया है इसलिए उन दोनों के प्रकाश में वैधानिक प्रश्न खड़ा होने से उक्त लेआउट स्वीकृति निरस्त की जाती है। लेकिन उक्त लेआउट निरस्त को अमली जामा पहनाने के पूर्व टाउन कंट्री प्लानिंग के नियमानुसार आप चाहे तो इसे 30 दिन के अंदर अंदर संभागायुक्त के यहां चैलेंज कर इस आदेश को निरस्त करवाने की स्वतंत्रता आपको है।

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