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समर्पण भाव ही देवत्व की ओर ले जाता है : डॉ प्रेमलता चुटैल

BySurendra Jain

Oct 25, 2021

खबर पक्की, 25 अक्टूबर, रतलाम। डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन स्मृति शोध संस्थान में मीरा जयंती महोत्सव की अध्यक्षता कर रही उज्जैन विक्रम विश्वविद्यालय हिंदी विभाग की पूर्व आचार्य एवम अध्यक्ष डॉ प्रेमलता चुटैल ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि मीरा का अदभुत समर्पण था। समर्पण भाव ही देवत्व की ओर ले जाता है। डॉ चुटैल ने कहा कि सामंती युग मे मीरा अकेली खड़ी थी और आज का हमारा नारी मुक्ति आंदोलन जिसमें नारी को अपनी स्वतंत्रता के लिए बड़े आंदोलन करने की आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने कहा कि मीर कृष्ण की सगुन साकार भक्त के साथ साथ संसार की बहुत बड़ी योग साधिका भी थी। मीरा ने बाल्यावस्था में ही कुंडलिनी शक्ति को जागृत किया था। हमारा धर्म विज्ञान सम्मत धर्म है। मीरा के साथ समूचा भक्तिकाल आज यहाँ उपस्थित है। मुख्य अतिथि डॉ मंगलेश्वरी जोशी ने कहा कि नवधा भक्ति का साकार रूप है मीरा बाई का व्यक्तित्व और कृतित्व उन्होंने ऐरी मैं तो प्रेम दीवानी एवम थे तो पलक उधारों दीनानाथ, मैं हाजिर नाजिर कब से खड़ी आदि पदों का सस्वर गायन किया। विशेष आतिथ्य प्रदान कर रही शिवकांता भदौरिया ने कहा कि मीरा का जन्म सामंती युग मे हुआ था पग धुँधरु बांध मीरा नाची रे! पद में मीरा का विद्रोहात्मक स्वर था। वे रूढिय़ों को तोड़कर आगे बढ़ी। मीरा ने सात्विक और पवित्र मार्ग को अपना कर लौकिक और कुत्सित जीवन से ऊपर उठकर अपने जीवन को दिव्य बनाया । रश्मि उपाधयाय ने मीरा की रागात्मक भक्ति एवम भारत की सन्त परम्परा के संदर्भ में भक्ति की प्रधानता के विषय मे वाल्मीकि की भक्ति उल्टा नाम जपत जेहि जाना वाल्मीकि भये ब्रह्म समाना! के साथ राम रतन धन पायो पद का गायन किया। वनिता भट्ट ने आली म्हाने लागे वृंदावन निको पद गया । सन्तोष दवे ने कहा की मीरा को राजस्थान की लोक कथाओं के आधार पर दिव्य दैवीय शक्ति के रूप में पूजा जाता है। डॉ उषा व्यास ने कहा कि मीरा नारी मात्र के लिए आदर्श है। पुरूष वर्ग के अहंकार को मीरा के व्यक्तित्व चरित्र एवम भक्ति परायणता ने खत्म किया है। रश्मि व्यास ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की । डॉ शोभना तिवारी ने मीरा की माधुर्य भाव की भक्ति पर एवम सायुज्य सामीप्य तथा आत्मबोध की भक्ति पर अपनी बात कहते हुए बसों मोरे नैनन में नन्दलाल पद को प्रस्तुत किया। संचालन डॉ शोभना तिवारी ने किया। आभार रश्मि उपाध्याय ने माना।

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