खबर पक्की : 30 सितंबर रतलाम, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा राष्ट्रपति और राज्यपाल के संबोधन से पहले महामहिम लगाने की प्रक्रिया को समाप्त करने के लिए अपनी मंज़ूरी दी थी और सरकार द्वारा इसको अमलीजामा पहनाने के बाद भारत में आम तौर पर इन पदों पर बैठे लोगों के लिए इन शब्दों के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लग चुका है l राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति रहते एक कार्यक्रम में छपे हुए निमंत्रण पत्रों से अपने नाम के आगे से महामहिम शब्द को हटाने के लिए कहा था जिससे इस काम की सही मायने में शुरुवात तो हो ही चुकी थी l अंग्रेजों के ज़माने में इस तरह के भारी भरकम नाम प्रयोग में लाये जाते थे जिसके कारण आज़ादी के बाद संभवतः भारतीय जनमानस को अपने नेताओं का क़द कुछ छोटा न लगे इस पर विचार करते हुए ही इन्हीं शब्दों के प्रयोग पर संविधान सभा ने मंज़ूरी प्रदान कर दी होगी पर अब जब बराबरी की बातें किये जाने के साथ सरकार द्वारा इन शब्दों को समाप्त किया जा चुका है तो इस अच्छे कदम का स्वागत करने और अपनाने के बजाए कर्नाटक के राज्यपाल के अभिनंदन समारोह के सारे hoarding बैनर और निमंत्रण पर महामहिम छपवाया जाना और उस पर माननीय थावरचंद गहलोत द्वारा संज्ञान नहीं लिया जाना आश्चर्यचकित कर देने वाला है क्योंकि यह निर्णय स्वयं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार द्वारा लिया गया है lअभी तक राष्ट्रपति और राज्यपालों को विशेषाधिकार दिए गए थे और उनके लिए विशेष सम्मान सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था l उससे यह कहीं न कहीं पुराने दिनों की याद दिलाता है पर जिस तरह से राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के कार्यकाल में इन शब्दों से छुटकारा पाने के लिए राष्ट्रपति भवन ने आदेश जारी किए थे उससे यह शब्द अब इतिहास बन गए हैं l अब उनका इतिहास का हिस्सा बनना तय हो गया हैl दिल्ली में राष्ट्रपति के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने से सम्बंधित मसले पर भी यह दिशा निर्देश दिए गए थे की यथा संभव इन्हें भी राष्ट्रपति भवन में ही आयोजित किया जाये जिससे राष्ट्रपति के आवागमन से आम लोगों को जो भी समस्याएं होती हैं उनसे भी निपटा जा सके l इस तरह से उनके कार्यकाल में राष्ट्रपति की भागीदारी वाले कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन में ही होने लगें थे जिससे आम जनता को यातायात सम्बन्धी समस्याओं से छुटकारा मिलना तय हो गया था और राष्ट्रपति की सुरक्षा सम्बन्धी बहुत सारी समस्याओं से भी निजात मिल गई थी l जिस तरह से प्राथमिकता के साथ इन निर्देशों को मोदी सरकार के गृह मंत्रालय ने लागू किया था उसके बाद भी कल के कार्यक्रम में इन शब्दों का उपयोग अपनी ही सरकार की अच्छी नीतियों की धज्जियां उड़ाना अखरने वाला है l ऐसा नहीं है कि अभी तक इन पदों पर आसीन हुए लोगों ने इस बारे में कुछ सोचा ही नहीं था पर आम लोगों के बीच यह महसूस करवाने के लिए कि राष्ट्रपति भी उनकी तरह ही देश का हिस्सा हैं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की इस पहल को मोदी सरकार ने पूरा समर्थन दिया था सभी प्रमुख अखबारों और चैनल वालों द्वारा भी इस बात को अनदेखा करना मीडिया की भी जागरूकता पर सवाल खड़ा करता है l
