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द्वारका रेजिडेंसी मामले मैं कल बिल्डर का पक्ष सुनेंगे कलेक्टर देखना दिलचस्प होगा जनहित में रास्ता बंद होता है या रास्ता निकलता है

BySurendra Jain

Sep 27, 2021

खबर पक्की : 27 सितंबर रतलाम, द्वारका रेजिडेंसी मामले में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के परिप्रेक्ष्य में कल कलेक्टर रतलाम सुनवाई करेंगे, 56 से लगाकर 2021 तक के सभी राजस्व रिकॉर्ड और तमाम रजिस्ट्री में सार्वजनिक रास्ता लिखा हुआ है l इसी आधार को ध्यान में रखते हुए पूर्व कलेक्टर द्वारा नजूल विभाग के माध्यम से बिल्डर को एनओसी दी गई l और नजूल से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद टाउन कंट्री प्लानिंग द्वारा इस प्रोजेक्ट को अप्रूवल दी गई उसी के बाद नगर निगम द्वारा बिल्डिंग परमिशन दी गई l सारे दस्तावेजों को देखने के बाद रेरा ने लाइसेंस जारी किया और रेरा के लाइसेंस देने के बाद अनेकों बैंकों द्वारा करोड़ों का लोन इस प्रॉपर्टी के खरीदारों को प्रोजेक्ट की वैधता को देखकर मंजूर किया l इसी के आधार पर रुचिरा चाहर और विकास गुरयानी नाम के खरीदारों की रजिस्ट्री हो चुकी है और बाकी अनुबंध कर्ताओं की रजिस्ट्री होना बाकी है l वर्तमान राजस्व रिकार्ड में भी उक्त सर्वे नंबर के 1 पॉइंट 710 हेक्टेयर भाग पर रिहायशी भवन बना होना बताया गया है तो स्वाभाविक है कि रिहायशी भवनों के बाहर रास्ता ही होगा उक्त प्रोजेक्ट में कुल ढाई सौ फ्लैट का निर्माण होना है तो स्वाभाविक है कि सभी फ्लैट मालिक उसी रास्ते से अपना आवागमन करेंगे l प्रशासन द्वारा स्वयं अपने ही विभागों द्वारा दी गई सभी अनुमतियों को नकारते हुए जिस तरह सार्वजनिक रास्ते को बंद कर सब्जी मंडी और पार्किंग आरक्षित करने की बचकाना बातें की जा रही है अमूमन इस तरह का हट कहीं देखने में नहीं आता है l जिस उतावलापन को दिखाते हुए प्रशासन द्वारा उक्त रास्ते को बाधित कर फेंसिंग कर दी गई थी और निर्माण अनुमति निरस्त करने की और सारी अनुमतिया रद्द करने की बात की जा रही थी लेकिन उसके बाद से कोई कार्यवाही नहीं करना और सिर्फ निरंतर अखबारों में स्टेटमेंट देना ताकि बिल्डर की छवि खराब हो और इस प्रोजेक्ट में बुकिंग करने वाले खरीदार भयभीत हो, कोरोना काल के चमकदार कार्यकाल को दागदार बना रहे हैं l एक तरफ प्रशासन स्टेटमेंट दे रहा है रेलवे कॉलोनी वासियों के लिए 10 फीट रास्ता छोड़ दिया जाएगा दूसरी तरफ अच्छा भला चौड़ा रास्ता प्रशासन को रास नहीं आ रहा है वर्तमान कानूनों के अनुसार किसी भी ब्रिज के दोनों तरफ से 6 मीटर आने जाने का रास्ता या खाली जगह होना अनिवार्य है लेकिन उस बढ़िया और शानदार रास्ते को प्रशासन बर्बाद करने पर तुला है ज्ञातव्य है कि बाहरी सुविधाओं को बनाने के लिए भी नगर निगम द्वारा बिल्डर को अनुबंध के आधार पर स्वीकृति दी गई है और इसके लिए दो करोड़ आश्रय निधि भी जमा कराई गई है l किसी भी अच्छे शहर की पहचान वहां की चौड़ी सड़कें बढ़िया ड्रेनेज सिस्टम बढ़िया विद्युतीकरण बढ़िया गार्डन आदि अनेक सुविधाएं होती है एक तरफ प्रशासन शहर में अवैध अतिक्रमण तोड़ने की मुहिम चला रहा है ताकि रास्तों की चौड़ाई बड़े और आवागमन सुलभ हो वहीं दूसरी तरफ खुद प्रशासन यहां सब्जी मंडी या पार्किंग बनाने की खबरें देकर अतिक्रमण को प्रोत्साहित करने की योजना पर काम कर रहा है l प्रशासन के इस विरोधाभासी कार्रवाई से पूर्व में उसके द्वारा जारी की गई अनुमति और कलेक्टर के आदेशों पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है गलती किसी से भी हो सकती है और जो काम करता है गलती उसी से होती है लेकिन अगर आपकी मंशा सही है तो उस गलती को सुधारा जा सकता है l अगर द्वारका रेजिडेंसी मामले में प्रशासन अपने रुख पर अडिग रहता है तो यह माना जाएगा कि कलेक्टर के आदेश का कोई औचित्य नहीं है और कोई भी नया कलेक्टर आकर उसके आदेश को खारिज कर सकता है l जो जनप्रतिनिधि रोड की चौड़ाई के लिए बाजना रोड पर दोनों तरफ सैकड़ों मकानों को गिरवा सकते हैं इस मामले में अच्छी भली चौड़ी रोड को खत्म करने के प्रयासों पर उनकी चुप्पी निसंदेह खटकने वाली है l देखते हैं कल जनहित के नाम पर प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय लेता हैl

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