• Wed. Jul 29th, 2026

कलेक्टर का आदेश द्वारका रेजिडेंसी के प्रमोटर को सुदामा ना बना दे l नया निवेश भी हो सकता है प्रभावित

BySurendra Jain

Sep 5, 2021

खबर पक्की: 5 सितंबर रतलाम, 29 अगस्त को कलेक्टर रतलाम द्वारा सैलाना रोड चेतक ओवर ब्रिज के नीचे स्थित द्वारका रेजिडेंसी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नगर निगम रतलाम की शर्तों के अधीन बाहरी विकास कार्य के शपथ पत्र के आधार पर बनाई गई कंक्रीट रोड को अधिग्रहित कर उस पर आवागमन रोक दिया गया। पूरा मामला इस प्रकार है कि रतलाम महाराज के आदेश क्रमांक 1378 दिनांक 5 अगस्त 1945 को मैसेज जगन्नाथ पिता आत्माराम को उक्त जमीन ऑयल मिल चलाने के परपस से महाराजा द्वारा दी गई थी I व्यापार में घाटा होने के कारण कर्जदारो ने उक्त जगन्नाथ पर वसूली हेतु केस दायर किया। जिस पर प्रथम व्यवहार न्यायाधीश रतलाम के आदेश से आयल मिल की डिक्री होकर उक्त आइल नीलामी में नंदलाल जवाहरलाल ने खरीदा l उक्त जवाहरलाल को नगर सुधार न्यास द्वारा भी एक भूखंड 1959 में आवंटन किया गया है l बाद में उक्त जवाहरलाल भी उक्त आयल मिल को चला नहीं पाए और उक्त आयल मिल जीवाजीराव शुगर मिल कंपनी दलोदा को 1973 में बेच दिया l तब तक जीवाजीराव शुगर मिल पर अधिग्रहण के कारण सरकार का कब्जा हो गया था l 1981 में जीवाजीराव शुगर मिल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग में डायरेक्टर एमपी अग्रवाल एवं तत्कालीन कलेक्टर मंदसौर पी एस तोमर ने इसको बेचने का निर्णय लिया और उक्त संपत्ति हैदरी एंड कंपनी एवं अन्य एक को बेच दी किंतु हैदरी एंड कंपनी की रजिस्ट्री नहीं होने के कारण उन्होंने कोर्ट में सिविल सूट दायर कर दिया था अंततः बाद में 3 जुलाई 1995 को हैदरी एंड कंपनी के पक्ष में जीवाजीराव शुगर मिल ने रजिस्ट्री करवा दी l लेकिन रजिस्ट्री होने के बाद भी तहसीलदार रतलाम द्वारा रतलाम कलेक्टर के निर्देश पर नामांतरण नहीं किया जा रहा था l जिस पर हैदरी एंड कंपनी कोर्ट में गए और कोर्ट में नामांतरण किए जाने का आदेश हैदरी एंड कंपनी के पक्ष में हुआ लेकिन कलेक्टर कलेक्टर ठहरे उन्होंने High court के आदेश को भी ठेंगा दिखा दिया और नामांतरण नहीं होने दिया फल स्वरूप 2012 में याचना हाई कोर्ट में कंटेंप्ट पिटिशन लगाए और 2013 में कोर्ट ने कलेक्टर को फटकार लगाते हुए तत्काल नामांतरण का आदेश दिया नहीं तो कार्रवाई की चेतावनी दी और अंततः2013 में इस जमीन का नामांतरण हो पाया l 1984 में खरीदी जमीन का 29 साल बाद एक वैधानिक क्रेता मालिक बन पाया l उक्त जमीन पर कलेक्टर नजूल द्वारा 14 जनवरी 19 को एनओसी जारी की गई l 24:10 19 में भी एक अन्य कंप्लेंट पर जमीन मालिक को क्लीन चिट दी गई है और शिकायत को नस्ती बध किया गया है l यहां यह दिलचस्प है कि कोई भी ब्रिज होता है तो उसके दोनों तरफ रोड होती है किंतु इस ओवर ब्रिज पर सीधे हाथ पर तो सड़क है उल्टे हाथ पर सड़क नहीं थी इस कमी को इस बिल्डर द्वारा पूरा कर दिया गया था l पूर्व में कलेक्टर द्वारा जारी सभी अनापत्ति में याची के भूखंड के आगे रास्ता बताया गया है उसी आधार पर टीएनसी नजूल और नगर निगम द्वारा याची को परमिशन दी गई है याचि का रेरा मैं प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड है इस आधार पर बैंकों द्वारा भी इस प्रोजेक्ट के लिए करोड़ों रुपए लोन दिया गया है l अगर याची ने 400 बीसी की या गलत दस्तावेज बनाए हैं तो उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाना चाहिए किंतु जब सारी अनुमतिया पिछले कलेक्टरों के कार्यकाल में शासकीय विभागों द्वारा जारी की गई है ऐसे में अकेले याची पर कार्रवाई कर इतना बड़ा वज्रपात उसे सड़क पर ला सकता है और शहर के विकास में आने वाला नया निवेश भी प्रभावित हो सकता है l जिला प्रशासन के जोश में की गई कार्रवाई के दूरगामी परिणाम भी हो सकता है इसलिए कोई भी कार्रवाई जोश के साथ होश में की जाना चाहिए l एक कलेक्टर अनुमति जारी करें और दूसरा निरस्त करें इसमें स्वयं जिला प्रशासन की विश्वसनीयता भी कटघरे में आ जाती है।

error: Content is protected !!