खबर पक्की: 19 मई रतलाम, वर्तमान में कोरोना महामारी को देखते हुए चल रहे लॉकडाउन में एक बड़ी गम्भीर विसंगति सामने आ रही है। पूरे मध्यप्रदेश में रतलाम को छोड़कर दवाइयों की दुकानों को बंद रखने के आदेश कहीं पर भी नहीं है एक रतलाम अनोखा शहर है जहां शाम को 4:00 बजे बाद अगर कोई आदमी को किसी प्रकार की तकलीफ हो जाए बीमार हो जाए एक्सीडेंट हो जाए और कोई गोली दवाई लेना हो तो भटकना पड़ेगा। जिन दुकानों से बीमारी को दूर करने की दवाई मिलती है उन्हें बंद करने का कोई औचित्य समझ से परे है और जब इतनी गंभीर महामारी चल रही है एक-एक मिनट बीमार आदमी के लिए कीमती है ऐसे समय में दवाई दुकानों को बंद रखने का आदेश बहुत ही क्रूर और अव्यावहारिक है। जिला औषधि विक्रेता संघ के जय छजलानी ने इस संबंध में चर्चा करते हुए बताया कि जिला प्रशासन के आदेश से मजबूर है ऐसे में हम किसी बीमार की चाहते हुए भी मदद नहीं कर सकते क्योंकि ₹5 की दवाई देने पर भी 2000 का चालान खट से बना दिया जाता है। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस बारे में विचार कर दवाई दुकानों को उनके नियमित समय पर खुले रखने के आदेश तुरंत जारी करना चाहिए इससे आम जनता को बहुत ज्यादा तकलीफ और परेशानी से गुजरना पड़ रहा है। यहां उल्लेखनीय है कि पिछले डेढ़ महीनों से आम आदमी घरों में कैद है और उनकी फिजिकल वर्किंग नहीं होने से गैस एसिडिटी सर दर्द जैसी बहुत सारी बीमारियां है जो इस lock-down के कारण बढ़ रही है और ऐसी बीमारी कि तुरंत दवाई लेने की बहुत जरूरत पड़ती है। अतः आम जनता के हित में दवाई दुकानों को तुरंत खोलने के आदेश जारी होना चाहिए।
