खबर पक्की :12 मई रतलाम, लगातार लॉकडाउन ने जनता के साथ-साथ पुलिस कर्मियों का भी फर्स्ट्रेशन बढ़ा दिया है कल शाम को विजय वोहरा की बेरहम पिटाई की घटना यही साबित करती है। वेद व्यास कॉलोनी में रहने वाले विजय वोहरा के पिता शैतान मल जी बोहरा का देहांत 3 मई को ही हुआ है। और उनकी मां कला बाई वोहरा को भी कोरोना हो गया था जिनकी हाल ही में अस्पताल से छुट्टी हुई है और मां के इलाज के सिलसिले में ही वे डॉक्टर अंकित जैन के यहां गए थे लेकिन डॉक्टर के नहीं मिलने से वह माँ के घर भोईरा बावड़ी से अपनी 24 वर्ष की मन्द बुद्धि बेटी मोहिनी को वेदव्यास कालोनी स्तिथ घर छोङने जा रहे थे। घास बाजार पर कुछ पुलिस वालों ने उनको रोका पूछताछ की उन्होंने अस्पताल के कागज बताएं और कहा कि बेटी को घर छोड़ ने जा रहा हूं तभी अमूमन शांत रहने वाले सब इंस्पेक्टर बसेर पीछे से आए और फिर विजय वोहरा के साथ उनकी कुछ बोला चार्ली होने पर उन्होंने उसके घर की चाबी और गाड़ी की चाबी ले ली उसके बाद जो कुछ भी हुआ वह सब आप लोगों ने वायरल वीडियो में देखा है। उसके बाद लठ बरसाते हुए पुलिस बाजार में घुमाते हुए इनको माणक चौक थाने ले गई यह घटना क्यों हुई इसकी तह में जाना जरूरी है पिछले 1 महीने से लगातार लॉक डाउन है पुलिसकर्मी भी लगातार ड्यूटी दे रहा है कोरोना के बढ़ते मामलों से वह भी तनाव में है और जनता तो खैर तनाव में है ही लेकिन 7 मई को कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर कलेक्टर गोपाल चंद्र डांड की विदाई और नवागत कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम की 9 मई को जॉइनिंग के साथ ही इस तरह के मामलों की पटकथा तय हो गई थी जब उन्होंने कहा कि कोरोना को सख्ती के साथ काबू में लाना है। क्योंकि जब पुलिस और प्रशासन की सख्ती की बात आती है तो वहां डंडा स्वयमेव आ जाता है। और जब जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा अपने मातहत स्टाफ को बगैर गुण दोष के सख्ती करने की छूट दे दी जाती है तो परिणाम विजय वोहरा जैसे लोगों की पिटाई के साथ सामने आते है। विजय वोहरा की पिटाई का सभी ने विरोध किया तेरापंथ समाज के अध्यक्ष अशोक दख ने समाज के लोगों के साथ मिलकर पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन भी दिया नगर विधायक चेतन कश्यप ने भी जिला प्रभारी मंत्री से इस संबंध में चर्चा की और दोषी पुलिस वालों पर कार्रवाई करने की मांग की परिणाम स्वरूप सब इंस्पेक्टर बसेर का निलंबन हुआ। निलंबन के बाद मैं समझता हूं कि जिले के बाकी पुलिस को भी यह समझ आ गया होगा की सख्ती कितनी करनी है और किस तरह करनी है क्योंकि क्योंकि अंतोतवागत्वा इस तरह की सख्ती की गाज मामला बिगड़ने पर निचले अधिकारियों कर्मचारियों पर ही गिरती है आदेश और निर्देश देने वालों का कुछ नहीं बिगड़ता। अतः सभी को कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए। अधिकारियों को भी निर्देश देते वक्त यह समझना चाहिए की उनके जरा से सख्ती के निर्देश से तिल का ताड़ और राई का पहाड़ बनते देर नहीं लगेगी। अतः जो भी निर्देश दे सोच समझकर उसके परिणाम जानकर दे।
