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जब आप खुद ही मरने पर तुले हुए हो तो क्या करेगा राम और क्या करेगा रहमान

BySurendra Jain

Mar 27, 2021

खबर पक्की : 27 मार्च रतलाम, दुख हर मौत का होता है होना भी चाहिए क्योंकि यही मानवता और मानवीयता का तकाजा है। भाई राजेश लोन कर की मौत का दुख हम सभी को है। लेकिन यहां वही मसल चरितार्थ हुई है कि अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। हर मोबाइल फोन और लैंडलाइन फोन पर वार्निंग देने और बचाव के उपाय बताने के बावजूद अगर आप कोरोना को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तो परिणाम वही होना है जो भाई राजेश लोनकर के साथ हुआ है कोरोना कोरोना है वह हिंदू मुस्लिम नहीं देखता, सिख इसाई नही देखता, दलित स्वर्ण नहीं देखता वह तो सिर्फ मास्क और सैनिटाइजर को देखता है और देखता है सोशल डिस्टेंसिंग और जहां यह सब दिख जाता है वह उधर का रुख नहीं करता है। हम भारतीय अपनी मूर्खता और नियम कायदों की धज्जियां उड़ाने के लिए पूरी दुनिया में कुख्यात है पर्यावरण का ध्यान रखते हुए पटाखे फोड़ने को मना किया जाता है तो हम तुरंत सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाने लगते हैं कि हम तो छोड़ेंगे देखते हैं कौन रोकेगा। महामारी के दौर को देखते हुए कलेक्टर महोदय ने आदेश निकाला शादी विवाह समारोह में और होली समारोह में बन्दिशें लगाई तो चिल्लाना शुरु कर दिया कि हम तो होली खेलेंगे होली मनाएंगे जब आप खुद ही मरने को तैयार हो तो कोई कहां तक रोकेगा कहां तक संभालेगा। कोई भी राजनीतिक कार्यक्रम या समारोह होता है विशेषकर सत्तारूढ़ दल का या उनके नेताओं का तो वहां सारे नियम कायदों की धज्जियां उड़ा दी जाती है अभी इसी महीने में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और गृहमंत्री का कार्यक्रम रतलाम में हुआ वहां कितना नियमों का पालन हुआ आपको भलीभांति परिचय है राजेश लोनकर की मौत पर आज जो इतना विधवा विलाप मीडिया दिखा रहा है इतना ही विधवा विलाप अगर वह राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर इससे ज्यादा ताकत से दिखाता और प्रशासन को नियम कायदों से चलने के लिए मजबूर करता तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। हर मौत मौत है और उस पर दुख होता है किंतु इसका यह मतलब नहीं कि रात दिन अपनी जान को खतरे में डालकर आपकी सेवा में जुटे चिकित्सा कर्मियों का इस तरह मनोबल तोड़ा जाए गेहूं में कंकर हर जगह पाए जाते हैं लेकिन उसके लिए पूरी संस्था को बदनाम कर वहां पर पढ़ रहे छात्र छात्राओं पर उसके दुष्प्रभाव का आकलन हर जिम्मेदार मीडिया को करना चाहिए इससे ना सिर्फ रतलाम शहर व रतलाम मेडिकल कॉलेज की पूरी इमेज पूरे देश और दुनिया में खराब हो रही है आज जब प्राइवेट अस्पतालों में लूट मची हुई थी पूरे कोरोना काल में इसी मेडिकल कॉलेज ने हजारों जानें बचाई है। इसी पुलिस और इसी प्रशासन ने अपनी जान जोखिम में डालकर आपको मदद करने में अपने तई भरसक प्रयास किया है यह मैं अपनी मर्जी से नहीं लिख रहा हूं इस शहर और इसके आसपास के जिलों के हजारों बाशिंदे है जिन्होंने इनकी सेवाओं का लाभ लिया है। आज भी होम कोरोंनटिन मरीजों के पास दिन में तीन से चार बार लगातार फोन पर हाल-चाल और मरीज की तबीयत पूछ कर टेंपरेचर ऑक्सीजन लेवल चेक किया जा रहा है और जरा सा भी तबीयत खराब लगने पर एंबुलेंस भेजकर मरीज को मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा है आज भी मेडिकल कॉलेज में 190 करोना मरीज भर्ती है जिन का इलाज किया जा रहा है कलेक्टर साहब के प्रयासों से 800 से 900 जांच पर डे का लेवल पहुंचा दिया गया है जो कोरोना की पिक में भी इतनी जांच नहीं हो पाई थी। अभी-अभी हमने अपनी बेवकूफी को नहीं छोड़ा नेतागिरी में और पावर में उलझे रहे मास्क व सैनिटाइजर का उपयोग करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया तो ना हिंदू को राम बचा पाएगा न मुसलमान को रहमान बचा पाएगा आप चाहे जिस धर्म के हो जिस मजहब के हो जिस जाती या समुदाय के हो मंत्री हो या संत्री हो कोरोना किसी का सगा नहीं है आपकी थोड़ी सी समझदारी ही आपका व आपके परिवार का जीवन सुरक्षित रख सकते हैं और आपकी थोड़ी सी मूर्खता आपको और आपके पूरे परिवार को खतरे में डाल सकती है अब भी ना संभले तो मिट जाओगे, दास्तां तक ना होगी दास्तानों में। जय हिंद जय भारत 2 गज दूरी मास्क भी जरूरी यही है समझदारी की निशानी

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