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सिनेमा और साहित्य का मणिकांचन संयोग है फणीश्वर नाथ रेणु का कथा साहित्य : प्रणेश जैन

BySurendra Jain

Mar 7, 2021

खबर पक्की, 7 मार्च, रतलाम। डॉ शिवमंगल सिंह सुमन स्मृति शोध संस्थान रतलाम में 4 मार्च को आंचलिक उपन्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु के जन्म शताब्दी दिवस पर उनके कथा साहित्य पर संगोष्ठी आयोजित की गई । संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे समीक्षक प्रणेश जैन ने कहा कि रेणु के कथा साहित्य में लोकमंगल की भावना एवं लोक रंग के चित्र यत्र तत्र सर्वत्र हैं उन्होंने कहा कि रतलाम में रेणु जी पर चर्चा पहली बार हुई डॉ सुमन शोध संस्थान में हुई। डॉ शोभना तिवारी बधाई की पात्र हैं। जब हम किसी रचनाकार पर चर्चा नहीं करेंगे तो रचना के धागे कैसे खुलेंगे। प्रणेश जी ने मारे गए गुलफाम एवं मैला आंचल के कथानक पर प्रकाश डाला। तीसरी कसम में राज कपूर के अभिनय को देखते हुए स्वयं रेणु जी ने कहा कि मेरा हीरामन मुझे मिल गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि वक्ता डॉ मोहन परमार ने अपने विशेष आलेख के माध्यम से रेणुजी के व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि रेणु जी स्वस्थ राजनीति के पक्षधर थे । रेणुजी ने ग्रामीण अंचल की पीड़ा को बहुत करीब से अनुभूत किया। रेणुजी वास्तव में धरती पुत्र थे। जेल जीवन रेणु जी के लिए वरदान साबित हुआ। उन्होंने कहा कि हिंदी लेखकों को गांव मेंकृषि कर्म के लिए भेजना चाहिए । कृषि कर्म एवम लेखन में साम्यता के पोषक थे रेणुजी ।उनके सभी पात्र संघर्षरत पात्र हैं संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि वक्ता के रूप में आशीष दशोत्तर ने प्रेमचंद जैनेंद्र कुमार के युग के बाद के समय पर प्रकाश डालते हुए रेणु जी एवं प्रेमचंद के कथा साहित्य के कथानक पात्रों पर चर्चा की। दशोत्तर ने कहा कि रेणु जी के पात्र आंचलिक पात्र थे ।आंचलिकता भी ग्राम्य जीवन की ठेंठ आंचलिकता को रेणुजी ने जीवन्त किया । प्रेमचंद के पात्र ग्रामीण से शहर की तरफ आते पात्र हैं। प्रेमचंद का कथानक शहर के निकट गांव की पगडंडी का कथानक है। तीसरी कसम फिल्म के गीतों के मुखड़े भी स्वयं रेणु जी द्वारा ठेठ देशज भाषा बिहार की पुरवइया बोली में लिखे गए थे ……चलत मुसाफिर मोह लियो रे पिंजरे वाली मुनिया। हरिशंकर भटनागर ने रेणु जी की कहानियों में लाल पान की बेगम के वाक्य विन्यास की चर्चा करते हुए उनके गीतों पर अपनी बात कही । श्रेणिक बाफना ने रेणु कि आंचलिकता पर बल देते हुए कहा कि साहित्यकार को अपने सृजन में जीवंतता बनाए रखते हुए खेतों में जाना चाहिए रेणु कृषि और कथा कर्म में समान दृष्टि रखते थे। अखिल स्नेही ने रेणु शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि यमुना के किनारे की रेतके कण रेणु कहे जाते हैं। जीवन भर अंचल की धूल अपने को मानते हुए महान कथाकार रेणु जी ने तीसरी कसम में अद्भुत गीत दिए हैं। अखिल स्नेही ने तीसरी कसम का गीत….. सजनवा बैरी हो गए हमार ! को गुंजित किया । अंजनी पांडे ने रेणुजी के मैंलाआँचल की आंचलिकता आंचलिक बोली पर प्रकाश डाला। दिलीप जोशी ने रेणु की कहानियों पर अपनी बात रखी। रश्मि उपाध्याय ने प्रेमचंद की कहानी ईदगाह के पात्रों का चित्रांकन करते हुए रेणु की कहानी संवादिया के पात्रों और उनकी आंचलिकता को केंद्र में रखते हुए मालवा अंचल की आंचलिकता एवं कथावस्तु पर अपनी बात कही तथा नई पीढ़ी में इस कथा साहित्य का रुझान कैसे हो इस पर अपनी चिंता व्यक्त की। डॉ शोभना तिवारी ने कहा कि आज रेणुजी के कथा साहित्य जीवन और व्यक्तित्व के साथ हम राज कपूर एवं शैलेंद्र के व्यक्तित्व पर भी दृष्टिपात कर पाए हैं। राज कपूर ने रेणुजी की भाव भाषा एवं कथानक के अनुरूप ही हीरामन को अपने व्यक्तित्व में जीवंत किया था। रेणुजी की आंचलिकता कैसे ऊंचाइयों को छू गई और हिंदी कथा सिने साहित्य में अपना अमर अमिट स्थान बना गई। संस्थान में हुई तात्कालिक संगोष्ठी में सभी ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ शोभना तिवारी ने किया। आभार लक्ष्मण पाठक ने माना।

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