खबर पक्की : 11 अक्टूबर रतलाम, रतलाम के नागरिकों की बरसों की मांग और जनप्रतिनिधियों के लगातार संघर्ष के बाद अस्तित्व में आया रतलाम मेडिकल कॉलेज कुछ लालची प्रवृत्ति वाले चिकित्सकों के कारण अपनी साख को बट्टा लगा रहा है। ताजा मामला 10 अक्टूबर का है जिसमें मेडिकल कॉलेज के फीवर क्लीनिक में किसी डॉक्टर संकेत बरमेचा के द्वारा वहां आए मरीज को जांच के लिए अर्नव पैथोलॉजी लैब शास्त्री नगर रतलाम का एड्रेस लिखते हुए फोन नंबर आदि सब लिखें और मरीज को कहा कि जांच वहीं पर करवाना बताया जाता है कि नियमित तौर पर मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को डॉक्टर इस तरह पर्ची पर प्राइवेट लैब और प्राइवेट मेडिकल दुकान से दवाई और सर्जिकल इक्विपमेंट खरीदने के लिए नाम लिख कर देते है कुछ मेडिकल दुकान वालों ने और लैब वालों ने तो डॉक्टर को अपनी सील दे रखी है जो डॉक्टर पर्ची पर लगा कर दे देते हैं लेकिन इस अर्नव पैथोलॉजी लैब के बारे में सूत्रों ने बताया है कि उक्त लैब मेडिकल कॉलेज में कार्यरत एक डॉक्टर की है जो मध्य प्रदेश मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन में पदाधिकारी भी है चुंकि उक्त डॉक्टर सरकारी नौकरी में है इसलिए खुले तौर पर यह प्राइवेट लैब नहीं चला सकता इसलिए उसने सरकारी नौकरी छोड़ चुके एक डॉक्टर को इसका कर्ताधर्ता बना दिया विधायक बनने के लिए सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने वाले इन महाशय द्वारा गत विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टी से टिकट के लिए भी खूब हाथ पैर पटके गए थे। आरक्षित वर्ग से आने वाले इन डॉ महोदय द्वारा अपने समुदाय के लिए काफी नेतागिरी की जाती है लेकिन वह नेतागिरी समुदाय हित के लिए नहीं बल्कि अपने निजी स्वार्थ को साधने के लिए की जाती है यह बात उनके समुदाय के लोग भी समझ चुके हैं। बहरहाल इस बारे में काफी सारी बातें आगे के समाचारों में प्रकाशित करेंगे किंतु मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों द्वारा जो गोरखधंधा किया जा रहा है वह रतलाम मेडिकल कॉलेज की साख को धक्का पहुंचा रहा है और वहां आने वाले मरीजों के विश्वास को तार-तार कर रहा है। इस मामले में रतलाम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रबंधन और जिला प्रशासन को तत्परता से कार्रवाई कर जनता के विश्वास को बहाल किया जाना चाहिए। शहर के माननीय विधायक को भी इस मामले में अपनी चिंताओं से ज़िला प्रशासन को अवगत कराकर ठोस कार्रवाई करना चाहिए।
