खबर पक्की 22 सितंबर,नई दिल्ली। किसानों के तमाम विरोध के बावजूद मोदी सरकार ने कृषि संबंधी दो बिल (Agri Bill 2020) बृहस्पतिवार को लोकसभा में पास करवा लिया है। एनडीए की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल से आने वाली केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इसके विरोध में इस्तीफा दे दिया। किसान नेताओं में भी सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा है। उनका कहना है कि ये बिल उन अन्नदाताओं की परेशानी बढ़ाएंगे जिन्होंने अर्थव्यवस्था को संभाले रखा है। कांट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) में कोई भी विवाद होने पर उसका फैसला सुलह बोर्ड में होगा। जिसका सबसे पावरफुल अधिकारी एसडीएम को बनाया गया है। इसकी अपील सिर्फ डीएम यानी कलेक्टर के यहां होगी।
राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य बिनोद आनंद के मुताबिक इसमें कांट्रैक्ट फार्मिंग से जुड़े मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा बिल का एक प्रावधान काफी खतरनाक है। जिसमें कहा गया है कि अनुबंध खेती के मामले में कंपनी और किसान के बीच विवाद होने की स्थिति में कोई सिविल कोर्ट (Civil Court) नहीं जा पाएगा। इस मामले में सारे अधिकार एसडीएम के हाथ में दे दिए गए हैं। और हर आदमी जानता है कि राजस्व अदालतों में ताकत और पैसे का खेल कैसे चलता है ऐसे में किसान बेमौत मारा जायेगा।
कृषि बिल: कांट्रैक्ट फार्मिंग में कंपनी के साथ विवाद होने पर कोर्ट नहीं जा सकेंगे किसान न्याय के दरवाजे बंद
