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विधायक की छबि देखकर बांटे जाएंगे भाजपा में टिकिट, उम्रदराज उम्मीदवार होंगे बाहर

BySurendra Jain

Aug 30, 2017

भोपाल। मिशन 2018 यानी विधानसभा चुनाव में तीसरी बार भी जय पाने का लक्ष्य लेकर चल रही भारतीय जनता पार्टी किसी भी सूरत में कमजोर विधायकों को चुनाव में नहीं उतारेगी। पार्टी ने तय किया है कि प्रत्येक दो महीने में अलग-अलग एजेंसियों से विधानसभा क्षेत्रों का सर्वे कराया जाएगा और विधायकों की उनके क्षेत्र में स्थिति का आंकलन किया जाएगा। कमजोर विधायक टिकिट की दौड़ से बाहर हो जाएंगे।

बुधवार को विधायक दल की बैठक में भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने भी विधायकों से जिलेवार बात की। विधायकों को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के निर्देशों से भी सभी को अवगत करा दिया है। सभी विधायकोंको साफ कह दिया गया कि उनके क्षेत्र का विकास तो टिकट का पैमाना होगा ही, टिकट के लिए उसकी छवि का योगदान भी निर्णायक होगा। बेहतर छबि और जीत की उम्मीद की शर्त पर ही टिकिट दिए जाएंगे। उम्रदराज नेताओं को भी पार्टी अब चुनाव मैदान में नहीं उतारना चाहती है। उनकी जगह परिजन या उनकी सहमति से उम्मदवार तय करने का फार्मूला अपनाया जाएगा।

सर्वे से बनेगी रणनीति

पार्टी नियमित रूप से विधायकों के परफार्मेंस को लेकर अलग-अलग एजेंसियों से सर्वे कराएगी। इसमें मुख्य आधार क्षेत्र में किया गया विकास तो होगा ही। विधायक के प्रति आम आदमी और कार्यकर्ताओं की सोच क्या है,यह राय महत्वपूर्ण होगी। लोगों के बीच विधायक की उपलब्धता कैसी है। जीवंत संपर्क है या नहीं। विधायक की छवि कैसी है। ये सारे मुद्दों पर परिणाम ठीक आया, तो ही विधायक को पुन: टिकट मिलेगी।

विधानसभा में आगे होगा मोदी का चेहरा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह साफ कर गए हैं कि आने वाले चुनाव में विधायक हो या नया प्रत्याशी, जीत के लिए उसका सिर्फ 25 फीसदी योगदान होगा। शाह के द्वारा दिए संकेतों से साफ है कि जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा ही पार्टी सामने रखेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही पार्टी वोट मांगेगी । पार्टी के फार्मूले में जीत के लिए 50 फीसदी योगदान मोदी के परफॉर्मेंस को माना गया है, मुख्यमंत्री के परफॉर्मेंस को 25 फीसदी और स्थानीय प्रत्याशी एवं कार्यकर्ता पर 25 फीसदी ही पार्टी आश्रित रहेगी।

उम्रदराज निशाने पर

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भले ही 75 साल का फार्मूला पार्टी में लागू होने से इंकार किया हो, लेकिन संगठन के निशाने पर वे सारे विधायक हैं, जिनकी उम्र 60 से 70 और इससे अधिक उम्र के हैं । ऐसे लोगों की जगह पार्टी अब नया चेहरा देने की तैयारी कर रही है।

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