खबर पक्की : 17 जुलाई ( दीपक चौहान शाजापुर) नौ की घोड़ी नब्बे का खर्च…इस कहावत को आपने आज तक सिर्फ सुना होगा, लेकिन यदि इसे हकीकत में चरितार्थ होते देखना है तो जिले की ग्राम पंचायत साजोद से अच्छा दूसरा कोई उदाहरण वर्तमान में नहीं हो सकता है। यहां के सूरमाओं ने 15 लाख की सड़क बनाकर भूगतान के नाम पर 19 लाख रूपये निकालने का सनसनीखेज कारनामा करके अच्छे-अच्छे गणितज्ञों के होश उड़ा दिए हैं। भ्रष्टाचार के खेल में सांसद निधि की राशी को भी हजम करने से परहेज नहीं करने वाले भ्रष्टाचारी भेड़ियों ने गांव के विकास के नाम पर जो गोलमाल किया, उसने शातिर ठगों को भी पीछे छोड़ दिया है।
जी हां हम बात कर रहे हैं भ्रष्टाचार की यूनिवर्सिटी बन चुकी शाजापुर जनपद पंचायत अन्तर्गत ग्राम पंचायत साजोद की। जहां विकास के नाम पर किए गए निर्माण कार्यों के मामले भ्रष्टाचार, घोटाले ओर गोलमाल की एक-दो नहीं बल्कि कई कहांनिया जिंदा सबूतों के साथ उजागर करते नजर आ रहे हैं। गांव में जारी भ्रष्टाचार की पंचवर्षीय योजना में सफलतापूर्वक विकास का सत्यानाश करने वाले साजोद के सूरमाओं ने सांसद निधि से गांव में एक सीसी रोड़ बनाई थी। जिसकी डीपीआर के मुताबिक 14 लाख 95 हजार की राशि निर्धारित हुई थी लेकिन सड़क निर्माण के दौरान जमकर बही भ्रष्टाचार की गंगा में कुंभ स्नान करने वालों ने सड़क की गुणवत्ता से समझौता करने के साथ निर्माण राशि को जिस ढंग से चूना लगाया उसने 15 लाख की सड़क पर 18 लाख 86 हजार से ज्यादा के बिल भुगतान के रूप चढ़ा दिए। करीब 4 लाख की अतिरिक्त धनराशि क्यों निकाली गई, उसका क्या प्रयोग हुआ इसका उचित जवाब किसी जिम्मेदार के पास नहीं है। घपला उजागर होने के बाद सरपंच, सचिव ओर रोजगार सहायक तीनों जिम्मेदार एक-दूसरे का नाम लेकर अब ये बवाल अपने माथे से बचाना चाह रहे हैं। इसमें एक ओर बड़ा आश्चर्य यह है कि जब भ्रष्टाचार का यह खेल खेला जा रहा था तब जनपद पंचायत के निकम्मे अधिकारी अपनी आंखे मूंदकर क्यों बैठे रहे। इस रोड़ की सीसी जारी करने वालों ने बिलों के अतिरिक्त भुगतान पर कार्रवाई क्यों नहीं की। इंजीनियर ने डीपीआर से अधिक भुगतान पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। इसके साथ ओर भी कई गंभीर सवाल हैं जो इस कारनामें में जिम्मेदारों की मिलीभगत होने की सच्ची गवाही देते नजर आते हैं। बहरहाल सौ चूहे खाकर हज पर जाने वाली इन बिल्लियों ने लाखों रूपये डकारने के बाद इस संबंध में जनपद पंचायत स्तर पर हुई जांच को भी दबा दिया लेकिन मीडिया को जवाब देने में असमर्थ पंचायत के जिम्मेदार अब भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ होने के बाद खुद इसकी सारी सच्चाई उजागर करते नजर आएंगे क्योंकि इस महाघोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की जा रही है। ताकि ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए मिलने वाली राशी को खुद पर खर्च करने वाली दीमकों पर न्यायोचित कार्रवाई के साथ इस राशी की रिकवरी हो सके।
साजोद में इस तरह बही भ्रष्टाचार की गंगा
भ्रष्टाचार की गंगा बहाने वाली साजोद ग्राम पंचायत के काले चिठ्ठे देखकर हर कोई आश्चर्य चकित हुए बगैर नहीं रह सकता। गांव के हर काम में भ्रष्टाचार के रिकार्ड ही टूटे हैं। भयंकर भ्रष्टाचार की इस गंगा में कुंभ स्नान करने वालों की कुंडली मय प्रमाण के मौजूद है। जानकारी के अनुसार जिला पंचायत स्तर से 15/08/2016 को बनाए गए रोड़ की डीपीआर 4 लाख की बनी थी जबकि भूगतान 5 लाख 30 हजार का कर दिया गया। 1 लाख 30 हजार के बिल फर्जी लगाए गए। इसी प्रकार 26/01/2017 को जनपद पंचायत स्तर पर बनाए गए रोड़ की डीपीआर 4 लाख की बनी थी जबकि भूगतान 4 लाख 34 हजार 800 का किया गया। यानि 34 हजार 800 के फर्जी बिल भुगतान किए गए। इतना ही नहीं 20/11/2017 को पंच-परमेश्वर योजनाअन्तर्गत बनाए गए रोड़ की डीपीआर 4 लाख 13 हजार की बनी थी जबकि भूगतान 7 लाख 46 हजार 600 का किया गया। यानि 3 लाख 33 हजार 600 की मोटी रकम के फर्जी बिल भुगतान किए गए। भ्रष्टाचार की यह लीला इतने पर ही नहीं थमी। गांव में सांसद निधि से किए गए निर्माण की 14 लाख 95 हजार की डीपीआर पर 18 लाख 86 हजार का भूगतान कर दिया गया
साजोद के सूरमाओं का सनसनीखेज कारनामा, 15 लाख की सड़क बनाकर निकाल लिए 19 लाख
