रतलाम । श्रीमंत माधवराव सिंधिया कृषि उपज मंडी प्रांगण रतलाम में स्थित 53 गोदामों की रजिस्ट्री के संदर्भ में एवं उसी से जुड़ी 4.710 हेक्टर जमीन पर समस्त लाइसेंसी व्यापारियों को भूखंड के आवंटन के संबंध में मंडी सचिव महोदय से 15 मई को दी ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल के निम्न सदस्य अध्यक्ष सुरेंद्र चत्तर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभय जी सेठिया, उपाध्यक्ष कैलाश जी महेश्वरी, अभय जी बोरा, सचिव वर्धमान जी बर्डिया, कोषाध्यक्ष कांतिलाल चोपड़ा, संचालक मनोज जी जैन, अध्यक्ष मंडी युवा व्यापारी संघ दिलीप जी मेहता, सचिव धर्मेंद्र जी माहेश्वरी, अध्यक्ष संघर्षशील लहसुन एवं प्याज मंडी युवा व्यापारी संघ निलेश जी बाफना आदि के साथ इसी विषय पर चर्चा हेतु भेंट की गई तथा उन्हें बताया कि उप संचालक महोदय ने परीक्षण हेतु आश्वासन दिया है हमारी संस्था द्वारा लाइसेंसी व्यापारियों की समस्या के संदर्भ में तथ्यों के साथ विस्तृत रूप से वर्तमान परिस्थिति में विपणन के दौरान व्यापारियों को आने वाली कठिनाइयां एवं उसके निराकरण हेतु जो बिंदु मेरे द्वारा विस्तृत रूप से प्रबंध संचालक महोदय एवं संयुक्त संचालक महोदय के नाम दिए पत्र में विस्तार से उनके समक्ष रखी गई है । उसमें आप समूचे व्यापारी जगत की कठिनाई की सत्यता से उन्हें अवगत कराए एवं उसमें हम भी पूरी तरह सहयोग करने को तैयार है उनसे मिलने पर पता लगा कि आपके द्वारा चाही गई परीक्षण रिपोर्ट उन्होंने 14 मई को ही भेज दी है मेरे द्वारा उसकी प्रतिलिपि मांगने पर उन्होंने मुझे उपलब्ध कराई उन्होंने उक्त गोदामों की रजिस्ट्री नहीं होने के लिए भूमि का किराए का निर्धारण ना हो पाना बताया गया इसके लिए दोष किसका है? भूमि के किराया निर्धारण में भी हमारी संस्था को बहुत परेशानी उठानी पड़ी थी तथा बहुत प्रयास करने के पश्चात उस समय के जिलाधीश महोदय आदरणीय राजेंद्र जी शर्मा ने हमारी संस्था को रचनात्मक सहयोग प्रदान किया तब उनके न्यायालय ने लीज़ रेंट का निर्धारण किया इसके साथ साथ सचिव महोदय द्वारा लिखा गया है कि स्ववित्तीय योजना में निर्मित होने से गोदाम की छत पर उनका अधिकार रहेगा (व्यापारियों का) यह शर्त अनुबंध मैं जोडऩे की मांग समक्ष में लगातार की जा रही है जबकि स्ववित्तीय योजना अंतर्गत भूमि मंडी समिति की है तो गोदाम की छत पर भी मंडी समिति का ही अधिकार रहेगा, क्योंकि मंडी समिति द्वारा केवल भूखंड का किराया व्यापारी गण से लिया जा रहा है ना कि गोदाम का, मंडी समिति अन्य रचना (जैसे भुगतान काउंटर) का निर्माण कर अन्य व्यापारियों को आवंटित कर सकती है इसी कारण आज तक 53 गोदामों की रजिस्ट्री संपादित नहीं हो पाई है। संस्था अध्यक्ष श्री सुरेंद्र चतर ने बताया कि यह कोई स्वर्ण का व्यापार नहीं है कि छोटी सी जगह में व्यक्ति विपणन कार्य संपादित कर सकें मंडी सचिव श्री वारसे जी ने निर्माण शाखा में पदस्थ श्री अमृतलाल जी सांखला को चर्चा हेतु हमारे समक्ष बुलाया सारी रिपोर्ट सांखला जी द्वारा तैयार की गई है उनका कहना है कि यदि आपको ऊपर की छत चाहिए तो आप अलग से फर्म बनाकर अलग से लाइसेंस लेवे एक फर्म को केवल एक ही संरचना अलॉट की जा सकती है । साखंला जी द्वारा गलत जानकारी दे कर भ्रमित किया जा रहा हे मण्डी समिति द्वारा भूखंड हमे लिज पर दे कर लिज रेंट ली जा रही हे एवं उस पर गोदाम छत सहित हमारी राशी से निर्माण किया गया उसके बाद रजिस्ट्री मे छत का हमारा हक नही लिखा जाना समझ से परे हे।
इनके द्वारा आपको यह कह कर भ्रमित किया जा रहा हे की एक लाइसेंस मे एक गोदाम ही आवंटन किया जा सकता हे हमारे द्वारा भी अन्य गोदाम का आवंटन नही मांगा जा रहा हमारे द्वारा आवंटित भूखंड जिस पर हमारी राशी से निर्माण किया गया हे उस पर मुलभुत सुविधा के लिये केवल निर्माण की अनुमती मांगी जा रही हैे ।
महोदय निर्माण शाखा प्रभारी मे या तो नियमो की जानकारी का अभाव है या ये मण्डी मे निर्माण कार्य अपनी मर्जी से करना चाहते है
मंडी प्रांगण के स्थापना काल से निर्माण शाखा में लगभग 20 वर्षों से जमे हुए इन महाशय को कैसे समझाए कि यदि नई फर्म ऊपर की संरचना ले भी लेगी तो मान लो वह ऊपर बैठकर भुगतान कर लेगा तो वह फर्म अपने खरीदी हुई कृषि उपज कहां रखेगा और वर्तमान में जिनके पास 53 गोदाम है उनको भुगतान और किसानों के बैठने, उनके स्टाफ, रिकॉर्ड रखने की अलमारी, पीने के पानी की व्यवस्था आदि कैसे हो पाएगी संपूर्ण कठिनाई को तथ्यों के साथ पूर्व के पत्र में अवगत करा चुका हूं । इन महाशय ने इस ओर से आंखें मूंद कर लगभग 15 वर्षों से जिस प्रकार रुकावट डालने का प्रयास यह कर रहे हैं उसी प्रयास को इनके द्वारा दोहराया गया है मेरा आपसे निवेदन है कि आप ने कैसे व्यक्ति को परीक्षण की जिम्मेदारी दे दी है जिन्होंने बिना हमसे संपर्क किए हमें बुलाए बिना ही तथ्य हिन आधार पर आपको रिपोर्ट बनाकर भेज दी जबकि मैंने पूर्व में ही आपको संपूर्ण तथ्यों के साथ यह निवेदन कर चुके हैं कि यहां अधिकार का कोई प्रश्न नहीं है यदि इस प्रांगण में हमारे अन्नदाता किसान भाई नहीं आएंगे तो क्यों कर इस प्रांगण में कोई रुकेगा मंडी समिति द्वारा दी गई जानकारी अनुसार 15 से 16 करोड़ रुपए का मंडी शुल्क का राजस्व शुल्क दाता व्यापारियों द्वारा दिया जाता है इससे यह स्पष्ट है कि लगभग 1000 करोड़ रुपए से अधिक की कृषि उपज रतलाम मंडी में आती है मैं तो आपसे यही निवेदन करना चाहता हूं कि जो तथ्य मेरे द्वारा पूर्व के पत्र में आपके समक्ष रखे गए हैं ऐसी और असुविधाजनक स्थिति में असुविधाओं के अंबार के मध्य विपणन कार्य संपादित करना कितना त्रासदी पूर्ण होता है आपको कितना लिखें आप यह भी सोचिए कि जहां करोड़ों रुपयों का कृषि उपज का दैनिक भुगतान होता है उस प्रांगण में 800 से 1000 लोगों की उपस्थिति रहती है जिसमें कई असामाजिक तत्व भी छद्म रूप में प्रवेश कर जाते हैं ऐसी स्थिति में कृषक बंधु तथा व्यापारी गण सभी को भारी असुरक्षित स्थिति में कार्य करना पड़ रहा है जहां जान माल का खतरा सदैव बना रहता है वहीं दूसरी और हजारों बोरी कृषि उपज खुले में असुरक्षित स्थिति में रखना पड़ रही है । जहां पिछले 20 वर्षों में सैकड़ों बार व्यापारियों की कृषि उपज की चोरी हो चुकी है सभी दृष्टि से सोचें तो व्यापारियों की सुविधा हेतु जो तथ्य आपके समस्त मेरे द्वारा रखे गए हैं वह मूलभूत अधिकारों की श्रेणी में आते हैं स्थान विशेष से अधिक मंडी शुल्क से भारी-भरकम राजस्व का महत्व है इसी कारण यह प्रांगण केवल लाइसेंसी व्यापारियों के लिए आरक्षित है विश्व बैंक ने भी पूरे देश में लगभग 20 वर्ष पूर्व आधुनिक मंडियों के विकास हेतु जो ऋण और अनुदान दिया गया था उसके पीछे भी मुख्य उद्देश्य सर्व सुविधा युक्त आधुनिक मंडी प्रांगण तैयार करवाना था इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि विपणन बोर्ड ने पूरे देश के सभी राज्यों में उन राज्यों के कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से एक से एक उत्तम और सर्वश्रेष्ठ सुविधाओं के साथ शत-प्रतिशत व्यापारियों को उनकी आवश्यकता अनुसार सभी सुविधाएं दी गई है एवं पूरा सहयोग किया गया है किंतु रतलाम मंडी में आपने ऐसे व्यक्तियों को अवसर दिया हुआ है जो वर्षों से यहां चिपके हुए हैं मैं तो यही कहूंगा कि ऐसे कम अनुभवी निर्माण शाखा में पदस्थ व्यक्तियों को अन्य कार्यों में उपयोग लेवे या इनका स्थानांतरण यहां से करें तथा किन्ही योग्य व्यक्तियों का सहयोग लेवे इन्हें जिले के बाहर नहीं भेज सकते हो तो जिले के आलोट, ताल जैसी छोटी मंडियों में पदस्थ करें इन बंधुओं को मुख्यालय की ‘ए’ श्रेणी की मुख्य मंडी के कार्य का अनुभव नहीं है या यह जानबूझकर इस समस्या को उलझा रहे हैं जैसे यह प्रांगण इन्हें उपहार स्वरूप इनके ससुर जी ने सौंप रखा है जिसकी योजना यह अपनी इच्छा अनुसार तोड़ मरोड़ कर बनाना और रुकावट कैसे खड़ी करना व्यक्तिगत लाभ कैसे प्राप्त करना इसी कार्य में वर्षों से लगे हुए हैं और ऐसा लगता है जैसे ये व्यापारियों पर उपकार और मेहरबानियां कर रहे हैं। यह सर्व सुविधा युक्त कार्यालय में बैठकर व्यापारियों को ज्ञान बांट रहे हैं इन्होंने बड़े-बड़े गोदाम बनवा दिए हैं और उनकी करोड़ों रुपए की मांग के टेंडर निकलवाते रहते हैं किंतु वे अभी तक नहीं बिक पाए हैं इतनी भारी रकम व्यापारी दे देगा तो व्यापार में पूंजी कहां से लगाएगा आप इनका कार्यालय उसमें से किसी बड़े गोदाम में शिफ्ट करवा दीजिए तथा थोड़े वर्षों तक इन्हें सार्वजनिक मूत्रालय और सुलभ कॉम्पलेक्स की सेवाओं का उपयोग करने दीजिए तब इन्हें सच्चा ज्ञान हो जाएगा थोड़ा सा अतिशयोक्ति पूर्ण लिख रहा हूं इसके लिए क्षमा चाहता हूं वर्षों से यहां पदस्थ होने के कारण इनकी चमड़ी इतनी मोटी हो गई है कि इन्हें शुल्क दाता व्यापारियों से जिससे इन्हें भारी भरकम वेतन मिल रहा है उन शुल्क दाता व्यापारियों की पीड़ा दिखना ही बंद हो गई है । प्रतिनिधिमंडल ने प्रबंध संचालक महोदय मंडी बोर्ड भोपाल जिलाधीश महोदय रतलाम नगर विधायक श्री चैतन्य जी कश्यप ग्रामीण विधायक श्री दिलीप जी मकवाना सांसद महोदय श्री गुमान सिंह जी डामोर मंडी भार साधक अधिकारी श्रीमती लक्ष्मी जी गामड़ आदि से मांग की है कि पूरे प्रदेश में जन कल्याणकारी भावना के साथ मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल ने भूमि के न्यूनतम किराए पर किराया क्रय योजना के अंतर्गत भूखंड दिए हैं जहां भवन कर्ताओं को संरचना के ऊपर निर्माण कार्य करने में कहीं भी बाधा नहीं है वह पूरे प्रदेश के अंदर अपने आवश्यकता अनुसार निर्माण कार्य करवा रहे हैं । इसी प्रकार पूरे प्रदेश में जिला उद्योग केंद्र किराए पर भूखंड दे रहा है भूमि का किराया भी न्यूनतम निर्धारित दर पर सभी उद्योग लगाने के इच्छुक जरूरतमंदों को दिए गए हैं और आज भी दिए जा रहे हैं ताकि प्रदेश का विकास हो इसी प्रकार मंडी प्रांगण लाइसेंसी व्यापारियों की आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के पीछे उद्देश्य प्रगति का है। आज कृषि उद्योग की तरह है रोजगार प्रदान करने का सबसे बड़ा क्षेत्र है हमारा देश कृषि प्रधान देश है।
अत: आपसे निवेदन है कि व्यापारियों, किसानों एवं आम नागरिकों के हित में न्यायोचित निर्णय करते हुए न्यूनतम किराए पर भूखंड आवंटित करने के साथ-साथ 53 गोदामों के ऊपर अटैच लेट बाथ, ऑफिस बनवाने की स्वीकृति प्रदान करने का कष्ट करें ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सके।
व्यापारियों को आने वाली कठिनाइयां एवं उसके निराकरण के लिए प्रबंध संचालक व संयुक्त संचालक के नाम दिए पत्र
