रतलाम। वर्तमान समय में माता-पिता बच्चों को इतना दुलार देते हैं कि उनकी गलतियों को भी नजरअंदाज कर जाते हैं और वही गलतियां आगे जाकर गुनाह में तब्दील हो जाती है। बच्चों के अच्छे कार्य के लिए प्रशंसा और गलतियों के लिए फटकार अति आवश्यक है। अत: बच्चों में भारतीय संस्कार और संस्कृति का सिंचन बेहद जरूरी है। यह बात सर्व ब्राह्मण महिला संगठन की अध्यक्ष डॉ. संध्या उपाध्याय ने कहीं। डॉ. उपाध्याय रामकृष्ण परमहंस विवेकानंद आश्रम पर बच्चों में संस्कार विषय पर आयोजित परिचर्चा में बोल रही थीं।
परिचर्चा में आद्य गौड़ महिला अध्यक्ष सुनीता पाठक, मोना शर्मा, नमिता शुक्ला, मंजू जोशी, सीमा भारद्वाज, कौशल्या त्रिवेदी, एवं गायत्री परिवार की राधा शर्मा ने विचार व्यक्त किए। महिलाओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कार हमारे जीवन का आधार है। संस्कार और संस्कृति तो हमारी पहचान है। इसके बिना जीवन व्यर्थ है।
सहनशीलता और सामंजस्य का संस्कार जरूरी
महिलाओं ने कहा कि वर्तमान दौर में देखने में आ रहा है कि लड़का हो या लड़की उसमें सहनशीलता एवं सामंजस्य की बहुत कमी हो रही है। नतीजतन तलाक अधिक हो रहे हैं। समय रहते बच्चों पर नियंत्रण और रोकथाम जरूरी है। अन्यथा घर बिगडऩे में देर नहीं लगती है।
उन वैवाहिक आयोजनों का करेंगे बहिष्कार
परिचर्चा के साथ ही सभी महिलाओं ने संकल्प लिया कि जहां वैवाहिक आयोजनों में प्रीवेडिंग बताई जाएगी, ऐसे वैवाहिक आयोजन का बहिष्कार करेंगे। ऐसे आयोजन में ना तो हम भोजन करेंगे और ना ही हमारे साथियों को भोजन करने देंगे, ताकि भारतीय संस्कृति को बचाया जा सके। साथ ही किसी भी आयोजन में जाएंगे तो वहां पर झूठन कतई नहीं छोड़ेंगे। जितना आहार ग्रहण कर सकते हैं, उतना ही हम अपनी थाली में लेंगे।
यह थीं मौजूद
आयोजन में सुनंदा मालोदिया, चन्दा उपाध्याय, उषा दुबे राशी पाराशर, शारदा पाठक, निर्मला तिवारी, आशा उपाध्याय आदि सदस्य उपस्थित थीं। संचालन प्रतिभा शाह ने किया एवं आभार राधा जोशी ने माना।
बच्चों में भारतीय संस्कार और संस्कृति का सिंचन जरूरी : डॉ. उपाध्याय, सर्व ब्राह्मण महिला संगठन की बैठक का आयोजन
