खबर पक्की : महाराष्ट्र की सियासी लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब इस पर कल यानी मंगलवार की सुबह साढ़े दस बजे कोर्ट का फैसला आएगा। आज सुबह सोमवार को कोर्ट में साढ़े दस बजे से सुनवाई शुरू हो गई थी। यह करीब डेढ़ घंटे तक चली। इसमें कोर्ट ने सभी पक्षों को ध्यान से सुना। हालांकि बीच में कई मौके गहमागहमी के भी आए। कोर्ट में अजित पवार की ओर से वह चिठ्ठी प्रस्तुत की गई जिसमें देवेंद्र फडनवीस को समर्थन दिए जाने की बात कही गई है। इसमें एनसीपी के सभी 54 विधायकों के दस्तखत हैं। इसके अलावा 11 अन्य विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है। अजित ने इस पत्र में लिखा है कि मैं NCP विधायक दल का नेता हूं। मुझे सभी विधायकों का समर्थन प्राप्त है। हमने यह तय किया है कि हम फडनवीस को समर्थन दें। कुल 170 विधायकों के समर्थन का दावा है।
तीन दलों का पत्र
कांग्रेस-राकांपा शिवसेना ने राजभवन में दिया पत्र कोर्ट में पेश किया। इसमें उन्होंने राज्यपाल से सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत किया था और कहा था कि वर्तमान सरकार के पास संख्या नहीं है।
अजित पवार के वकील ने कहा पत्र कानूनन सही
कोर्ट में अजित पवार के वकील मनिंदर सिंह ने कहा है कि राज्यपाल को दी गई चिट्ठियां कानूनन रूप से सही हैं। बाद में उपजी स्थितियों पर अब बहस क्यों हो रही है। अजित पवार ही एनसीपी हैं।
उधर, मेहता ने कोर्ट में यह भी दलील दी थी कि महाराष्ट्र के चुनाव का परिणाम 24 अक्टूबर को आ गया था। याचिकाकर्ता पहले राज्यपाल के पास पहले क्यों नहीं गए। कोर्ट में तुषार मेहता ने चिठ्ठी भी पेश की है। यह वही चिट्ठी है जिसके आधार पर राज्यपाल ने इन्हें शपथ दिलाई थी।
यहां NCP- कांग्रेस-शिवसेना की संयुक्त याचिका पर कपिल सिब्बल (शिवसेना के वकील) और अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस-राकांपा के वकील), मुकुल रोहतगी (महाराष्ट्र भाजपा के वकील) और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में मौजूद हैं।
यह लड़ाई रविवार को ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गई थी। कल शुरुआती दलीलें सुनने के बाद जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अशोक भूषण व जस्टिस संजय खन्ना की पीठ ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए सोमवार सुबह 10.30 फिर सुनवाई करने की बात कही थी।
आज इस सुनवाई पर पूरे देश की नजर टिकी है। माना जा रहा है कि राज्यपाल के न्योते और पार्टियों द्वारा किए गए दावों के पत्र देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट फ्लोर टेस्ट (Floor Test) का आदेश जारी कर सकता है। यह भी देखना अहम होगा कि इसके लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कितना समय मिलता है।
इस साल यह तीसरा मौका रहा जब रविवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इससे पहले 20 अप्रैल को तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के खिलाफ एक पूर्व कर्मचारी के खिलाफ यौन प्रताड़ना मामले में और इसी माह 9 नवंबर को अयोध्या मामले में फैसला सुनाया था।
बहरहाल, महाराष्ट्र के केस में तुषार मेहता में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की पैरवी की, जबकि मुकुल रोहतगी दो भाजपा विधायकों के वकील के रूप में पेश हुए। इनके सामने कपिल सिब्बल थे, जिन्होंने शिवसेना का पक्ष रखा। वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने राकांपा व कांग्रेस की ओर से दलीलें पेश कीं।
महाराष्ट्र मामले में सुनवाई पूरी, कल सुबह 10.30 बजे आएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला
