धर्म डेस्क। क्या आपने किसी मंदिर में भगवान की प्रतिमा को उल्टा स्थापित देखा है। नहीं ना, लेकिन मध्यप्रदेश के मालवाचंल में ही एक ऐसा भी मंदिर है जहां भगवान हनुमान जी की प्रतिमा उल्टी स्थापित है। प्रतिमा का सिर जमीन की तरफ है और पांव उपर की ओर। भगवान की पूजा अर्चना यहां इसी रूप में की जाती है। पूरी दुनिया में हनुमानजी की उल्टी प्रतिमा वाला यह एक मात्र मंदिर है।
जी हां, यह मंदिर है उज्जैन शहर से करीब 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित सांवेर के हनुमानजी का। प्रतिमा के कारण मंदिर का नाम ही उल्टे हनुमान मंदिर पड़ गया है। जानकार बताते है कि यह मंदिर रामायणकालीन है। यहां कई संतो की समाधियां भी है। मान्यता है कि जो कोई श्रद्धालु यहां प्रत्येक मंगलवार को दर्शन करने आता है तो उस भक्त की मनोकामना पूरी होती है। मंगलावार और शनिवार को यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
इसलिए उल्टी है प्रतिमा
रामायण काल में अहिरावण ने भगवान श्री राम और लक्ष्मण का अपहरण किया और उन्हें पाताल लोक ले गया। तब भगवान राम की सहायता के लिए हनुमान जी पाताल लोक पहुंचे और अहिरावण का वध किया। मंदिर की प्रतिमा इसी घटना से जुड़ी है, भक्त मानते है कि यह प्रतिमा भगवान हनुमान के पाताल लोक में प्रवेश को दर्शाती है, इसी कारण प्रतिमा उल्टी है। इस मन्दिर परिसर में श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, शिव-पार्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां पर परिजात के दो पेड़ भी है। पुराणों में कहा गया है कि परिजात में हनुमानजी का वास होता है।
