रतलाम। गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानि जीएसटी। 1 जुलाई से केंद्र सरकार ने पूरे देश में समान रूप से लागू किया। अभी चंद ही दिन बीते है कि कुछ बेईमान कारोबारियों ने इससे बचने के रास्ते भी तलाश लिए है। जीएसटी की चोरी के लिए बाजार में एक नया तरीका आया है, इसे कोड नाम दिया गया है-सील लिफाफा। सूत्रों की माने तो सील लिफाफा के जरिए बड़े पैमाने पर कर चोरी की जा रही है और इसमें कुछ कंपनियों सहित बड़े कारोबारियों की चेन काम पर जुट गई है। कुछ चार्टड एकाउंटेंट्स का भी मानना हैँ कि सील लिफाफा के जरिए कर चोरी के तरीके शुरू हुए है, हालांकि चार्टड एकाउंटेंट्स यह भी मानते है कि सरकार का सिस्टम पूरी तरह फ्लो में आने के बाद ऐसा संभव नहीं हो सकेगा।
क्या है सील लिफाफा सिस्टम
उदाहरण के तौर पर यदि गुजरात की किसी कंपनी से मध्यप्रदेश के किसी होलसेल डीलर के पास कंपनी का कोई उत्पाद भेजा गया है, ट्रक के साथ बिल्टी सहित अन्य दस्तावेज पूरे कर उसे रवाना किया जाता है। सारे वेलिड कागज एक सीलबंद लिफाफे में रखे जाते है। रास्ते में यदि कहीं पर ट्रक की चेकिंग हुई तो ड्राइवर वेलिड दस्तावेज दिखा देता है और यदि जांच नहीं हो सकी तो डीलर के पास पहुंचने के तत्काल बाद वेलिड दस्तावेजों को फाड़कर नष्ट कर दिया जाता है। डीलर से क्लियरेंस मिलते ही कंपनी भी अपने स्टाक से उतनी ही मात्रा का माल लदान गायब कर देती है।
ईमानदार कारोबारियों को चपत
सील लिफाफा सिस्टम के जरिए बिना कर चुकाए जो माल कारोबारी तक पहुंचता है वह सस्ता होता है, जाहिर है डीलर इस उत्पाद को बाजार में कम कीमत पर भी बेच सकेगा। इससे बेइमान कारोबारी के प्रतिस्पर्धी जो टैक्स चुकाकर काम कर रहे है, उन्हें नुकसान हो रहा है।
