खबर पक्की: 4 अगस्त रतलाम, जी एस आई एस प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता के स्थानीय प्राधिकारी साईं कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर किशोर कछावा ने बताया कि उन्होंने 2010 से 2013 के लिए और 2013 से 2016 के लिए रेलवे रनिंग रूम का मेंटेनेंस और सब्सिडी खाना प्रदाय के टेंडर लिए थे उपरोक्त कोलकाता की कंपनी के लिए स्थानीय प्राधिकारी के तौर पर उन्होंने उक्त टेंडर पर साइन किए थे। उन्होंने बताया कि उनका टेंडर सिर्फ रनिंग रूम मेंटेनेंस के लिए था किंतु रेलवे के सहायक इंजीनियर एसके निगम द्वारा कोटेशन के आधार पर सब्सिडाइज खाने के लिए कहा तो उन्होंने उक्त कार्य भी किया किन्तु सहायक इंजीनियर निगम ने रेलवे के वित्तीय नियमों के खिलाफ जाकर उन्हें उक्त कार्य का नगद भुगतान किया और उसमें से रिश्वत के ₹500000 जबरन रख लिए जब इस बात पर विवाद हुआ तो उन्होंने रिश्वत के 480000 नगद और और 20000 इंजीनियर निगम ने अपने चेक के माध्यम से उन्हें वापस दिए। और इस अनियमितता के कारण उक्त सहायक इंजीनियर को पदावनत कर के डी ग्रेड करके दाहोद ट्रांसफर किया गया किंतु इस खुंदक के कारण उक्त इंजीनियर ने उनके खिलाफ गलत शलत लिखित प्रतिवेदन दिया जिसके कारण सेंट्रल विजिलेंस कमिशन द्वारा 67 लाख रुपए की अतिरिक्त पेनल्टी लगा दी किंतु पेनल्टी केस आधार पर के हिसाब से लगाए गए उसका आज तक जवाब मांगने पर दिया नहीं जा रहा है उन्होंने बताया कि 2010 से 2013 तक के कार्य का भुगतान होने के बाद 2013 से 2016 के कार्य के भुगतान में पूर्व की रिकवरी निकाला जाना पूरी तरह गलत है रेलवे के सामान्य टेंडर शर्तों में किसी भी बिल में 10% से ज्यादा की पेनल्टी लगाने का क्लॉज कहीं पर भी नहीं है लेकिन रेलवे द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ा कर उक्त कार्य किया जा रहा है उन्होंने बताया कि उनका अंतिम बिल 7948 286 का था खेल तो रेलवे के अधिकारियों द्वारा बाद में मनमानी पूर्वक इस बिल को रिवाइज करके 119 08 174 रुपए का कर दिया गया और इस पर एक करोड़ छप्पन लाख सैतीस लाख आठ सो इक्कानु रूपये पेनल्टी आरोपित की गई मतलब जितने का बिल नहीं था उससे दोगुना पेनल्टी लगा दी गई रतलाम डिवीजन के लोकप्रिय डीआरएम सुनकर के होते हुए रेलवे के अधिकारियों द्वारा इस तरह की मनमानी करना बहुत ही आश्चर्य प्रकट करता है रेलवे की साफ सुथरी स्वच्छ छवि के लिए डी आर एम सुनकर को इस मामले में तुरंत पहल करके निर्णय लेना चाहिए।
