खबर पक्की : रतलाम। जैसा कि आपको विदित है कि सन् 2012 से एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट के लिये मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद प्रयासरत है व आज तक एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं किया गया। वर्ष 2018 में तात्कालीन शिवराज सरकार ने कैबिनेट की बैठक में एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट पास किया फिर सदन की बैठक न हो पाने के कारण वह बिल के रूप में न आ सका। फिर दोबारा शिवराज सरकार ने कैबिनेट में इसे अध्यादेश के रूप में एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट को पास किया। अध्यादेश तुरंत लागू नहीं हो सका क्योंकि उस अधिनियम में प्रस्तावित दण्ड प्रचलित दण्ड संहिता से अधिक थे जिसके अनुमोदन के लिये माननीय राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिये भेजा गया। सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाने के कारण अध्यादेश विधिक रूप नहीं आ सका। वर्तमान सरकार ने भी अपने वचन पत्र मे एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट को लाने का वचन दिया था। उक्त वचन को याद दिलाने के लिये मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद ने पूरे प्रदेश में एक दिन का प्रतिवाद दिवस मनाया था, लेकिन सरकार ने उसके बाद भी इस अधिनियम के प्रति गैर जिम्मेदाराना प्रक्रिया अपनायी है और 3 कैबिनेट के मंत्री जीतू पटवारी, गोविंद सिंह राजपूत और ओमकार सिंह मरकाम ने विरोध दर्ज कराकर उक्त विधेयक को रोक दिया है और वहां मंत्रीमण्डल की बैठक में जिन शब्दावलियों का उपयोग किया गया है वह आपत्तिजनक है। जिस कारण अधिवक्ताओं में रोष है। अधिवक्ताओं के रोष को देखते हुये व एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट के बारे में लगातार उपेक्षा का व्यवहार को देखते हुये मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद ने 1 दिन का प्रतिवाद दिवस दिनांक 16.07.19, मंगलवार को मनाये जाने का निर्णय लिया है, लेकिन अगर राज्य सरकार कार्यवाही न करे तो यह कुछ समय के लिये या अनिश्चित काल के लिये बढाया जाये।
अत: आप दृढता से प्रतिवाद दिवस मानये एवं मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद कैबिनेट के मंत्री जीतू पटवारी, गोविंद सिंह राजपूत और ओमकार सिंह मरकाम की निंदा करती है व मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद आपसे अनुरोध करती है कि आप मंगलवार, 16 जुलाई 2019 को अपने अधिवक्ता संघ में एकत्र होकर कैबिनेट मिनिस्टर जीतू पटवारी, गोविंद सिंह राजपूत और ओमकार सिंह मरकाम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करे व निंदा प्रस्ताव जिलाध्यक्ष एवं एस डी ओ के माध्यम से माननीय राज्यपाल महोदया के पास भिजवायें एवं उनसे अनुरोध करे कि यदि राज्य सरकार द्वारा कार्यवाही नहीं की गयी तो मध्यप्रदेश राज्य के अभिभाषक एक लम्बे आदोलन के लिये मज़बूर होंगे। साथ ही आप अपने-अपने क्षेत्र के विधायकों को पत्र लिखकर, फोन एवं वाट्सएप के जरिये यह अनुरोध करें की वे वर्तमान सरकार के माननीय मुख्यमंत्री को बाध्य करें कि वे विल लाये एवं विधायकगण प्राइवेट विल के रूप में एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट को इसी विधान सभा में रखें। आशा है कि आप पूर्व की भांती सक्रिय भागीदारी से उक्त आंदोलन को चलायेंगे।
एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं करने के कारण 16 जुलाई को वकीलों का प्रतिवाद दिवस
