खबर पक्की: 31 मई रतलाम, 29 मई की रात को दीनदयाल नगर थाने में जो कुछ भी हुआ, थाने की खिड़कियों के कांच फोड़े गए पत्थरबाजी कर पथराव किया गया और जनता और पुलिस के अंदर जो भय उत्पन्न करने की कोशिश की गई उसकी परिणिति में रतलाम पुलिस कप्तान और उनकी मातहत पुलिस ने जो कुछ भी किया वह तारीफे काबिल है। एक जिम्मेदार पुलिस संगठन को कानून का राज बुलंद रखने के लिए यही सब कुछ करना चाहिए और रतलाम पुलिस ने अपने कप्तान की कप्तानी में अपने कर्तव्य को बखूबी निभाया और निश्चित रूप से उसके इस कार्य की प्रशंसा होना चाहिए। जिन लोगों ने कानून हाथ में लेकर पुलिस को डराने की कोशिश की और जनता और पुलिस में भय उत्पन्न किया उनके खिलाफ पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर ऐसे तत्वों को साफ संदेश दे दिया कि किसी भी सूरत में रतलाम की फिजा को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा चाहे ऐसे तत्व किसी भी सांप्रदायिक संगठन से जुड़े हुए क्यों ना हो बगैर भेदभाव के पुलिस का डंडा अपना काम करेगा। मिडिया द्वारा पुलिस की चापलूसी और मक्खन पालिसी के में सख्त खिलाफ हूं क्योंकि मीडिया ही एक ऐसा आईना है जिसमें पुलिस अपना सही चेहरा देख पाती है किंतु आज बड़े और प्रतिष्ठित अखबारों द्वारा जिस तरह पुलिस के अच्छे काम को उचित जगह नहीं देते हुए रतलाम की शांत फिजा को बिगाड़ने वाले तत्वों के रतलाम बंद के आह्वान को जिस प्रमुखता से प्रकाशित किया गया वह चिंतनीय है। किंतु रतलाम की जनता की प्रशंसा करना होगी कि उसने ऐसे तत्वों को व ऐसी खबरों को तवज्जो न देते हुए रतलाम बंद को पूरी तरह फ्लॉप कर दिया इसके लिए उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है इसके लिए तमाम राजनीतिक पार्टिया सभी संगठन समाज सेवी संस्थाएं व जागरूक नागरिक बधाई के पात्र है और रतलाम पुलिस को इसके लिए सैल्यूट करना चाहिए कि उसने कानून के राज को और पुलिस का इकबाल बुलंद रखने के लिए समय रहते सही कार्रवाई की शाबाश रतलाम सेल्यूट रतलाम पुलिस।
