एक लोकतान्त्रिक देश में सभी को अधिकार है कि वो अपनी बात रख सके। लेकिन शनिवार को जो हुवा इससे नगर का नाम बदनाम हुवा हे। किसी भी राजनीतिक दल को दूसरे दल का विरोध करने का हक है। लेकिन वो विरोध लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। आज तक नगर में कई बार बड़े बड़े नेताओं को कांले झंडे दिखाए गए। विरोध में आलोट बंद किया गया लेकिन कभी भी सभा स्थल पर किसी भी दल के कार्यक्रताओं ने सभा को बिगाड़ने का प्रयास नही किया। लेकिन नगर में एक नई परम्परा की शुरुवात करते हुवे भाजपा कार्यकर्ताओ ने सभा स्थल पर पहुचकर कांले झंडे दिखाने का प्रयास किया। जो बिलकुल भी लोकतांत्रिक नहीं था। विरोध करना ही था तो रास्ते में कही भी किया जा सकता था । और सिद्धू का विरोध करने आए लोगो को यह भी पता नही चला की जिसका विरोध करने वो आए हे वो तो सभा स्थल पर पंहुचे ही नही बावजूद कांले झंडे लेकर सभा स्थल पर पहुचने का क्या तुक विरोध करना उनका अधिकार है लेकिन सभा स्थल पर हंगामा करना ये कतई उचित नही था।
