खबर पक्की: 14 अप्रैल नई दिल्ली ,देश के चर्चित व्हिसिलब्लोवर आईएफएस अफसर संजीव चतुर्वेदी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर स्वास्थ्य मंत्री से टेलीफोन पर हुई उस बातचीत के ब्यौरे का खुलासा करने की मांग की है, जिसके बाद से उन्हें एम्स के सीवीओ पद से हटाए जाने और उत्पीड़न का सिलसिला शुरू हो गया। आरटीआई से इस बात का खुलासा हो चुका है कि 23 अगस्त 2014 को एम्स के इस बहुचर्चित केस में पीएम मोदी ने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ। हर्षवर्धन से टेलीफोनिक बातचीत की थी, मगर उन्होंने क्या बातचीत की थी, इसका जिक्र अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है. बातचीत के कंटेंट को अब चतुर्वेदी ने उजागर करने की मांग की है। चतुर्वेदी के मुताबिक, उनकी आरटीआई अर्जी पर खुद मंत्रालय ने बताया था कि केस के सिलसिले मे पीएम ने स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत की। आरटीआई जवाब के मुताबिक, 23 अगस्त 2014 को केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा ने पीएमओ को लिखा,”माननीय प्रधानमंत्री ने एम्स के सीवीओ पद से संजीव चतुर्वेदी को हटाने से जुड़े मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से टेलीफोन पर बातचीत की। इस सबंध में एक विस्तृत नोट भारत के माननीय पीएम के अवलोककनार्थ प्रस्तुत किया गया है।”
संजीव ने पीएम मोदी से पूछा है कि केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों के उन मामलों में अब तक क्या कार्रवाई हुई, जिसे केंद्रीय सूचना आयोग पहले ही सार्वजनिक करने के लिए पीएमओ को कह चुका है। चतुर्वेदी ने यह भी कहा है कि करप्शन के खिलाफ लड़ाई के कारण उन्हें परेशान करने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ हुई कार्रवाई की भी जानकारी दी जाए। पीएम मोदी को भेजे पत्र में चतुर्वेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री की टेलीफोनिक कॉल के बाद उन्हें न केवल तमाम तरह के उत्पीड़नों से गुजरना पड़ा, बल्कि ‘अंतहीन मुकदमेबाजी’ भी झेलनी पड़ी। एक अफसर की आवाज को दबाने के लिए सरकार की तरफ से करीब 15 केस अलग-अलग न्यायालयों में ठोक दिए गए, जिसमें चार केस तो हाई कोर्ट में किए गए, वहीं एक सुप्रीम कोर्ट में।
जिनके खिलाफ की पीएम से शिकायत, उन्हें बना दिया मंत्री
संजीव चतुर्वेदी ने पत्र में हैरानी जताते हुए कहा है- जब एम्स में बतौर सीवीओ 2012-14 के बीच मैं घोटाले के दो सौ से ज्यादा मामलों की जांच कर एक्शन में जुटा था, जिसमें एम्स के तत्कालीन डायरेक्टर, दो डिप्टी डायरेक्टर, जिसमें एक 1982 बैच के आईएएस और दूसरे 1993 बैच के आईपीएस अफसर सहित कई अन्य जिम्मेदार फंसे थे।तब तत्कालीन राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा ऐसा करने से रोकने में जुटे थे। सीवीओ पद से हटवाने के लिए नड्डा ने सांसद की हैसियत से 2013 से जून 2014 तक तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को कुल चार पत्र लिखे और मीटिंग भी की। इसके दस्तावेज़ भी मेरे पास मौजूद हैं। जबकि मेरे इस काम की 23 मई 2014 को खुद एम्स प्रशासन ने एक नोट में तारीफ करते हुए सत्यनिष्ठ और ईमानदार अफसर क़रार दिया था।इस बीच साजिशन अगस्त 2014 में मुझे सीवीओ पद से हटा दिया गया।
जब पीएम मोदी ने पद से हटाने के मामले में स्वास्थ्य मंत्री से बात की तो चतुर्वेदी ने 26 सितंबर 2014 को पीएम मोदी को केस के सभी पहलुओं से अवगत कराने के लिए 56 दस्तावेजों के साथ प्रत्यावेदन भेज कर केस में जांच की मांग की।चतुर्वेदी ने पीएम मोदी को भेजे प्रत्यावेदन मे एम्स मामले में जेपी नड्डा की भूमिका पर सवाल उठाए।जिस पर पीएमओ ने आठ अक्टूबर 2014 और 10 फरवरी 2015 को इस मामले में हेल्थ मिनिस्टी से रिपोर्ट मांगी। हालांकि चतुर्वेदी ने दावा किया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रिपोर्ट देने के बावजूद आज तक पीएमओ ने इस मामले में कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझी। खुद एक आरटीआई के जवाब में पीएमओ यह बता चुका है। बकौल चतुर्वेदी,”उम्मीद थी कि मसले पर गंभीर पीएम मोदी कुछ एक्शन लेंगे, मगर धक्का तब लगा, जब उन्होंने एम्स में गड़बड़ी करने वाले आरोपियों के खिलाफ ऐक्शन का निर्देश देने की जगह उन नड्डा को ही स्वास्थ्य मंत्री बना दिया।” जिसके बाद नड्डा के अंडर में वह एम्स आ गया, जहां घपले की जांचें वह रुकवाना चाहते थे। संजीव चतुर्वेदी ने पत्र के अंत में लिखा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरे इन मुद्दों का संज्ञान लेकर अगर आप कार्रवाई नहीं करते हैं तो न खाऊंगा न खाने दूंगा और चौकीदार जैसे सारे नारे व्यर्थ है।
