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क्या 3 करोड़ की वसूली के लिए जा रहा था सब इंस्पेक्टर बंधवार ? मामला राजस्थान पुलिस पर गोली चालन का

BySurendra Jain

Mar 31, 2019

खबर पक्की:  रतलाम 31 मार्च सराफा से प्राप्त सूत्रों के अनुसार सराफा बाजार मैं जीतमल केसरीमल किराना व्यवसाई के पास स्थित एक सर्राफा व्यवसायी गोविन्द डमरु जो कि पहले क्रिकेट का भी बड़ा बुकी था  को धोखा देकर कोई व्यक्ति 3 करोड़ की टोपी दे गया इस 3 करोड़ की वसूली के लिए गोविन्द डमरू ने अपने भतीजे दीपक अग्रवाल को कहा दीपक ने अपने परिचित सब इंस्पेक्टर विरेंद्र बंद वार के साथ इसकी वसूली के लिए प्लानिंग की। चूँकि सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र बंधवार को कंटेनर से कार चोरी के मामले में राजस्थान जाना था और उसमें उदयपुर रुकने का प्लान था इसी के मद्देनजर वीरेंद्र बंधवार ने दीपक अग्रवाल को उसके पैसे की वसूली के लिए जो कि राजस्थान में ही किसी पार्टी से लेना थे उदयपुर बुलवा लिया था और उसमें एक्टिवा के नंबर प्लेट की कार प्लानिंग के तहत उपयोग कर रहे थे ताकि कुछ उल्टा सीधा होने पर गाड़ी का पता नहीं चल पाए जब दीपक अग्रवाल विरेंद्र बंद वार को लेने इसके होटल पर पहुंचा तो यह तुरंत ही किसी से मिलने का बहाना करके दीपक अग्रवाल के साथ हो लिया वास्तव में किसी व्यक्ति से पैसे की वसूली के लिए उसको दम देने के लिए जा रहा था किंतु गोगुंदा थाने के पास किसी अफीम तस्कर को पकड़ने के लिए खड़ी पुलिस की गाड़ी को देखकर जब इन्होंने कार को पलट कर भागने का प्रयास किया और पुलिस ने इनका पीछा करना शुरू किया तो विरेंद्र बंधवार  ने फायरिंग कर दी जिसमें राजस्थान पुलिस का जवान घायल हो गया। यहां सवाल यही खड़ा होता है कि किसी तफ्तीश के लिए जांच टीम का हिस्सा बने उप निरीक्षक विरेंद्र बंधवार  किसी प्राइवेट व्यक्ति दीपक अग्रवाल के साथ कहां जा रहा था और क्या उसने जांच टीम से कुछ घंटों के लिए अलग होने के लिए पुलिस अधीक्षक से इजाजत ली थी। या उसने जांच टीम को यह बताया था कि वह दीपक अग्रवाल के साथ किस से मिलने जा रहा था। और जब वह किसी से मिलने जा रहा था और उसका कोई गलत इरादा नहीं था तो उसको फर्जी नंबर प्लेट की निजी गाड़ी में सवार होने की क्या जरूरत थी। कुल मिलाकर इन सभी सवालों का जवाब सराफा में चल रही कानाफूसी को पुष्ट करता है कि गोविन्द डमरू ने अपने साथ हुई चीटिंग के 3 करोड़ रूपए लेने के लिए अवैधानिक रूप से रतलाम पुलिस का इस्तेमाल किया और रतलाम पुलिस ने भी अपना इस्तेमाल होने दिया। अब इन सारे सवालों के जवाब तो पुलिस की गहराई से तफ्तीश के पश्चात ही साफ हो सकेंगे के आखिर उप निरीक्षक विरेंद्र बंद वार को गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी? ऐसा क्या कर दिया था या करने जा रहे थे जिस को छुपाने के लिए वह गोली चला कर भाग रहे थे।

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