खबर पक्की: जावरा के कुंदन कुटीर यौन शोषण मामले को लेकर हो रही तत्थ्यात्मक और खोज परक रिपोर्टिंग से परेशान होकर पुलिस ने पत्रकारों पर लगाम लगाने के लिये पत्रकारों को धमकाने के उद्देश्य से उनको नोटिस भेजना शुरू कर दिया है कल 8 फर को 4 पत्रकारों पत्रिका के रूपराम गोयल,राजएक्सप्रेस के अरुण सहलोत,दैनिक अवन्तिका के सन्दीप मेहता, और खबर पक्की के सुरेंद्र जैन को जावरा के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस डी आर मालू ने नोटिस भेजा की आपने अपने वेब पोर्टल पर 4 फर को यह छापा की “पुलिस ने प्रशासन की रिपोर्ट पर महज अपराधियो की गिरफ्तारी कर खानापूरी की और कोर्ट में न तो उनके रिमांड की मांग की और न संदिग्ध जगहों पर ठिकानो पर छापे मारकर कोई जब्ती की उससे रतलाम की संवेदनशील जनता के मन में अनेक सवाल उठ रहे है” इस खबर के प्रकाशन को पुलिस आपराधिक प्रकरण की परिधि में मानती है और इस कारण चारो पत्रकारों से अपने प्रकाशन में माफ़ी प्रकाशित करने और लिखित में माफ़ी मांगने की मांग की गई है। जबकि वास्तविकता यह है कि इस प्रकरण में पुलिस ने 31 जनवरी को इन अपराधियो को गिरफ्तार कर 1 जनवरी को कोर्ट में पेश किया था और उस दिन कोर्ट में रिमांड की कोई मांग नही की गई थी और कोर्ट ने इन्हें जेल भेज दिया था। 3 फर को को खबर पक्की ने 5 बज कर 36 मिनिट पर यह खबर बैंक आफ इंडिया के रिटायर्ड कर्मचारी सूर्यप्रकाश दवे के हवाले से छापते हुवे जनता में उठ रहे सवालो को आवाज दी थी और फिर 4 फर को बाकी के 3 अखबारों राजएक्सप्रेस, पत्रिका,और अवन्तिका में यह खबर छपी थी और मीडिया में आने के बाद 4 तारीख को पुलिस ने कोर्ट में आवेदन लगाकर इस मामले के आरोपियों का रिमांड मांगा जो उसे 6 तारीख तक का रिमाण्ड कोर्ट ने पुलिस को दिया। एक तरफ मुख्यमंत्री कमलनाथ और राहुल गांधी कह रहे है की यह अफसरों की नही जनता की सरकार है और दूसरी तरफ जनता की आवाज को धार देने वाले मीडियाकर्मियों को नोटिस देकर अफसर जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचने नही देना चाहते। नोटिस में लिखा है कि उक्त प्रकरण में पुलिस पूर्णरूप से कर्तव्यनिष्ट होकर पूरी ईमानदारी से कार्यवाही कर रही है इसकी जगह अगर पुलिस ये लिखती की पुलिस हर प्रकरण में पूरी ईमानदारी और कर्तव्य निष्टा से कार्य करती है और इस प्रकरण में भी उसी निष्टा से कार्य कर रही है तो ज्यादा ठीक होता पर कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी का उल्लेख सिर्फ इस प्रकरण के लिये कर बाकी प्रकरणों की सच्चाई पुलिस ने स्वयं ही स्वीकार कर ली है, पर पुलिस से इस नोटिस के संदर्भ में मेरा इतना ही कहना है कि आप जो कर रहे हो उसके लिये सरकार आपको जो भी सुविधाएं वेतन देती है वह जनता के खून पसीने के टेक्स से मिलता है और उसी जनता के हितों की रक्षा के लिये पत्रकारों की कलम चलती है और पत्रकारों को आज कितना क्या मिलता है किसी को कुछ बताने की जरूरत नही है अगर आप नोटिस देकर सोचते है कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को डरा कर धमका कर जनता की आवाज को बुलंद करने से रोक लेंगे तो यह आपकी बड़ी भूल है क्योंकि पत्रकारिता क्षेत्र की यह खासियत है की एक जाता है तो दस उसकी जगह भरने के लिये तैयार है में यह नही कहता की इस पेशे में सभी दूध के धुले है जिस तरह समाज के सभी क्षेत्रों में गिरावट आई है उसी तरह इस पेशे में भी कुछ दागी आपको मिल जायेंगे पर फिर भी में दावे के साथ कह सकता हूं पुलिस और पत्रकारों की ईमानदारी का यदि सर्वे करवाया जाए तो पत्रकार ही ऊँचे पायदान पर मिलगे, आज भी पत्रकारिता में लगे फिल्ड पत्रकार सर्वाधिक ईमानदार और जनता के दुःख दर्दो को उठाने वाली कौम है और आप इनको डराकर कुछ हासिल नही कर पाएंगे सिवाय असफलता के अगर आपको लगता है जनता की आवाज को और उसके बीच उठ रहे प्रश्नों को उठाकर आप तक पहुंचाने से आपकी मान हानि हो गई है तो आप शौक से इस पर फौजदारी प्रकरण कायम कीजिये क्योंकि जनता की आवाज आप तक पहुंचाने और मजबूर दबे कुचलो को न्याय दिलाने में यह मान हानि आगे भी होती रहेंगी इस लिये आप अपना काम कीजिये हमे अपना करने दे हमे इस देश की पुलिस, कानून और कोर्ट पर पूरा भरोसा है। धन्यवाद जय हिंद।
