खबर पक्की: 8 जनवरी को पकड़े गए सट्टे के आरोपी राकेश पिता रतनलाल खन्नीवाल व मुकेश पिता रतन लाल खन्नीवाल द्वारा आज एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर यह बताया कि वह दोनों भाई बालाजी हार्डवेयर के नाम से हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं उनके पास जीएसटी नंबर है और नियमित रूप से इनकम टैक्स रिटर्न भरते है उनको आज तक किसी भी मामले में किसी भी कोर्ट से किसी प्रकार की कोई सजा नहीं हुई है उसके बावजूद पुलिस ने उनका झूठा सट्टे का केस बनाया और दुकान की सिल्लक के रूपये ले गए और उन्हें सट्टे की राशि बता रहे हैं जबकि वह रुपए उनके मेवाड़ा समाज की धर्मशाला के और दुकान की सिल्लक के थे और उसके एक एक ₹ का हिसाब उनके पास है। उनके द्वारा पत्रकारों को दी गई प्रमाणित दस्तावेजों की नकल से पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से स्वयमेव प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे है। उनके द्वारा साक्ष्य के रूप में रतलाम से प्रकाशित एक अखबार का 9 जनवरी का अंक प्रस्तुत किया गया जिसके तीन नंबर पेज पर राकेश और मुकेश के हथकड़ी लगे फोटो है थाना प्रभारी माणक चौक का बयान है जिसमें थाना प्रभारी कह रहे हैं कि इन दोनों के खिलाफ जुआ एक्ट और प्रतिबंधात्मक धाराओं में कार्रवाई की गई है जब के अनुविभागीय अधिकारी रतलाम के यहां प्रस्तुत इस्तगासा में सारी कार्रवाई 9 जनवरी को दोपहर 12:10 पर बताई गई है जबकि 9 तारीख को सुबह बंटने वाले अखबारों में यह खबर छप चुकी थी तो इससे पुलिस की सारी कार्रवाई संदेह के घेरे में आ जाती है। यही नहीं इस्तगासा में थाना प्रभारी द्वारा आरोपियों को बांड ओवर करने का लिखा जाता है और इस आधार पर जब अनुविभागीय अधिकारी द्वारा 10000 की जमानत पर आरोपियों को छोड़ने का आदेश लिख दिया जाता है साथ में जमानत दार का नाम आदि सब आदेश पट्टिका में लिखा जाता है फिर बाद में उसी इस्तगासे में थाना प्रभारी द्वारा अलग से हाथ से लिख कर आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की विनती की जाती है तो अनुविभागीय अधिकारी द्वारा पुनः नया आदेश टाइप करवा कर यह लिख दिया जाता है कि आरोपी द्वारा जमानत पेश नहीं की इसलिए इनको जेल भेजा जाए और आगामी सुनवाई 18 जनवरी तय कर दी जाती है और 18 जनवरी के लिए नियत किये गया प्रकरण को 11 जनवरी को पुनः सुनकर 11 जनवरी को जमानत दे दी जाती है । अनुविभागीय अधिकारी के आदेशों की छाया प्रति और इस्तगासा की भी प्रमाणित प्रति आरोपियों द्वारा पत्रकारों को वितरित करते हुए पुलिस व प्रशासन की कार्यवाही की शिकायत मुख्य मंत्री कमलनाथ सहित पुलिस महानिदेशक भोपाल गृहमंत्री भोपाल राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली और चीफ जस्टिस आफ एमपी जबलपुर को की गई है प्रकरण सच्चा है या झूठा यह तो अदालत तय करेगी किंतु पुलिस व प्रशासन की लचर कार्रवाई से यह जरूर साबित हो गया है कि जिम्मेदार किस तरह अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं। यही कारण है कि अधिकांश प्रकरण में पुलिस की लचर कार्रवाई के बदौलत अपराधी छूट जाते है।
