नई दिल्ली : हर कदम हमेशा बेहतर हो जरूरी नहीं। कभी-कभी कुछ दावं उल्टे भी पड़ जाते है। ऐसा ही कुछ हुआ है रेल्वे की विंग आईआरसीटीसी के साथ। नोटबंदी के दौरान केंद्र सरकार ने केशलेस को बढ़ावा देने के लिए ई टिकिट बुकिंग पर सर्विस चार्ज की छूट क्या दी, आईआरसीटीसी की हालत पतली हो गई है। अब तक उसे 650 करोड़ का घाटा हो चुका है। मजे की बात तो यह है कि जिस पूरी कवायद यानि ई टिकिटिंग को बढ़ाने के लिए यह घाटा उठाया गया उसमें केवल 4 प्रतिशत ही बढ़ोत्री हुई है।
बीते साल नोटबंदी के दौरान नकदी की किल्लत होने और कैशलैश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने रेलवे के ई-टिकट की बुकिंग पर सर्विस चार्ज से छूट देने का आदेश जारी किया था। शुरूआत में यह आदेश 31 दिसम्बर 2016 तक के लिए था। इस अवधि में आई.आर.सी.टी.सी. को करीब 80 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था, बाद में इस छूट को बढ़ाकर 31 मार्च 2017 और फिर 30 जून 2017 तक कर दिया गया । इस कारण स्लीपर श्रेणी के ई-टिकट की बुकिंग पर 20 रुपए और वातानुकुलित श्रेणी की बुकिंग पर 40 रुपए की छूट यात्रियों को मिली है । नोटबंदी के दौरान नकदी की कमी के कारण ई-टिकट की बुकिंग के लिए यात्रियों ने आई.आर.सी.टी.सी. की ओर रुख कर लिया है।
नोटबंदी से पहले आई.आर.सी.टी.सी. रोजाना कुल आरक्षित रेल टिकट का 60 प्रतिशत टिकट बुक करती थी और शेष 40 प्रतिशत टिकट बुकिंग रेलवे के विंडो काऊंटरों पर होता था । नोटबंदी के बाद यह बढ़कर 68 प्रतिशत हो गया था, लेकिन अब यह कम होकर 64 प्रतिशत पर आ गया। समझा जा रहा है कि नकदी की कमी के कारण यह आंकड़ा बढ़ा है और फिर जैसे ही नकदी की कमी दूर हो गई फिर यात्रियों ने रेलवे के टिकट विंडो की ओर रुख कर लिया है। आई.आर.सी.टी.सी. की कमाई का प्रमुख जरिया उसकी वैबसाइट से होने वाली ई-टिकट से मिलने वाला सर्विस चार्ज ही है। इससे मिलने वाले राजस्व से वैबसाइट मैंटेंन करने के अलावा आई.आर.सी.टी.सी. अन्य खर्चों को निपटाती है, लेकिन इस कमाई पर ग्रहण लगने से आई.आर.सी.टी.सी. के सामने कई मुश्किलें हैं।
