खबर पक्की: रतलाम शहर सीट पर यूँ तो भाजपा और कांग्रेस का कोई भी बागी नहीं है किन्तु उसके बावजूद यहाँ दोनों ही पार्टियों में भीतरघातियों की भी कोई कमी नही है इसलिए दोनों ही पार्टीयो को अपने घर में छिपे गद्दारो से सावधान रहना होगा। खबरपक्की के सर्वे में यह बात बहुत स्पष्टता के साथ उभर कर आई है कि ऐसे अनेक लोग है जो रातदिन जिस पार्टी के साथ रह रहे है काम कर रहे है, थोड़ी सी अंतरंगता और विश्वास में लेकर उनसे बात की जाये तो अपनी पार्टी अपने ही प्रत्याशी अपने ही नेताओ की वे ऐसे लानत मलामत करते है जैसे उनसे बड़ा कोई दुश्मन उनका दूसरा कोई है ही नही यह बात दोनों पार्टियों के अनेक कार्यकर्ताओ पर समान रूप से लागू है पर भाजपा इससे ज्यादा पीड़ित दिखाई दी है जबकि कांग्रेस के नाराज नेता और कार्य कर्ता भले प्रत्याशी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम नही कर रहे है पर उसके बावजूद उनकी नाराजगी उतनी मुखर नही है जितनी की सत्तारूढ़ दल भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं में दिखाई दी है इसलिए दोनों ही दलों को ऐसे तत्वों से। सावधान रहना होगा ऐसे तत्वों के लिए गीतकार और कवि नीरज की यह पंक्तिया सटीक बैठती है कि “” अब तो रहबर भी नजर आते हैं रहजन की तरह, लोग ईमान बदलते हैं कैलेंडर की तरह, और जिनकी वफा पर एहतराम था हमें, मेरे पहलू में बैठे हैं लोग वही खंजर की तरह””। अगर दोनों ही दलों ने इस मुद्दे पर सतर्कता नहीं रखी तो अपने आकलन से काफी पीछे रह जायेगे वे अतः अपनी संभावनाओं को उज्जवल बनाए रखने के लिए इनको अपने गद्दारों से सावधान रहना चाहिए।
