संपादकीय…
खबर पक्की: कल एससी एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने जो जवाब दिया है उससे तो यह साबित होता है कि देश की जांच एजेंसियां, सुप्रीम कोर्ट, स्वर्ण व अन्य समाज, वर्गो के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ने वाले अभिभाषक सभी झूठे थे मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश अपने जवाब में कहा कि कोर्ट से बरी होने का मतलब यह नहीं कि एससी एसटी एक्ट में लगाया गए आरोप गलत थे या झूठे थे। इसका सीधा सा मतलब है कि बचाव करने वाले वकील ने गलत बचाव किया जांच एजेंसियों ने गलत रिपोर्ट दी और उस आधार पर कोर्ट ने गलत फैसले लिए। इससे पूरी दुनिया में भारतीय कोर्ट भारतीय जांच व्यवस्था और भारतीय वकीलों के कामकाज पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। अगर इसी बात को नजीर बनाया जाए तो अमित शाह और नरेंद्र मोदी भी कोर्ट से बरी हुए हैं तो इस को क्या माना जाए कि उनके खिलाफ लगाये गये आरोप भी सच्चे थे उसके बावजूद भी वे बरी हो गए। भैया आप बरी हुए तो आप के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे थे। आप के खिलाफ वकीलों ने सही दलील दी जांच एजेंसी ने सही जांच की और जज ने सही फैसला किया और दूसरे बरी हुए तो उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सच्चे थे वकीलों ने झूठी दलील दी जांच एजेंसियों ने गलत जांच की और जज ने गलत फैसला देकर बरी कर दिया यह कैसा मापदंड है। वोट की राजनीति करने के लिए अगर हम कांग्रेस को सांप नाथ माने तो भाजपा को नागनाथ मानना होगा क्योंकि यह वोट की राजनीति में उससे भी दो कदम आगे जा रही है वोट की राजनीति के लिए वह देश की सामाजिक समरसता को खत्म करने पर तुली हुई है हिंदू हिंदू को लड़ाने पर तुली हुई है और देश की जांच एजेंसियों और सुप्रीम कोर्ट पर ही सवाल उठा रही है। क्या ऐसे जवाब और ऐसी जड़ बुद्धि से लिए गए निर्णयो से देश और दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ेगी या की विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर देश वापस कबीलाई युग में जायेगा।
