खबर पक्की: अगर आप निर्माण के लिए सरिया खरीदने जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए थिंक फर्स्ट कंस्ट्रक्शन काउंसिल ने देश के नामी गिरामी 26 ब्रांड का लैब में टेस्टिंग करवाया है जिसमें से 18 ब्रांड निर्धारित पैरामीटर पर फेल हो गए हैं। आए दिन टीवी पर नियमित विज्ञापन चलाने वाले ब्रांड 2 से ₹3 किलो तक का प्रीमियम ग्राहकों से वसूल रहे हैं लेकिन इनका सरिया लैब में फेल हो रहा है। फेल होने वाले मशहूर ब्रांड में गोयल,GK,SRMB,SEL, कामधेनु, अंबा शक्ति, कैप्टन टीएमटी, श्याम जैसे नामी गिरामी ब्रांड है। जबकि पास होने वाले ब्रांड में सेल, टाटा, जेएसडब्ल्यू जेएसपीएल, आरआईएनएल, राठी शक्ति इलेक्ट्रोस्टील है थिंक फर्स्ट कंस्ट्रक्शन काउंसिल ने इस्पात मंत्रालय को इसकी शिकायत की है। ऐसे ब्रांडो पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि टीएमटी की निर्माता कंपनियां अपनी लागत कम करने के लिए कई महंगे केमिकल जैसे फास्फोरस और सल्फर की मात्रा सरिया में कम मिलाना इससे सरिए की क्वालिटी में बहुत फर्क पड़ता है। जिससे मकान या कोई भी निर्माण टिकाऊ और मजबूत नहीं हो पाता है। ताज्जुब की बात यह है कि देश का इस्पात मंत्रालय इस बारे में क्या कर रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि देश के कुछ ही ब्रांड लोहा अयस्क खनिज से सरिया बनाते हैं। बाकी सेकेंडरी मार्केट के ज्यादातर सरिया निर्माता स्क्रेप और कबाड़ से रीसायकल कर सरिया बनाते हैं। यही कारण है कि ऐसे निर्माता अपने लागत कम करने के लिए और मार्केट में बने रहने के लिए क्वालिटी से समझौता करते है। देश में बन रहे बड़े-बड़े बहन रेलवे सेना मल्टी स्टोरी ओं और बहुत हैवी निर्माण कार्य में भी यह सरिया प्रयुक्त किया जा रहा है और इसके लिए प्रीमियम भी दिया जा रहा है उसके बावजूद सरिए की क्वालिटी में गड़बड़ होना बहुत चिंताजनक बात है। देश का 6 खरब रुपए का निर्माण इससे संकट में आ सकता है। सरिया की घटिया क्वालिटी के ऊपर अभी हाल ही में 6 मिनट की पूरी खबर ABP न्यूज ने चलाई है। अच्छा यदि आप भी निर्माण के लिए सरिया खरीदने जा रहे हैं तो थोड़ी पूछताछ कर सरिए की क्वालिटी के बारे में खात्री करले और ज्यादा शंका होने पर किसी पॉलिटेक्निक या इंजीनियरिंग कॉलेज में लैब टेस्ट करवा ले।
