खबर पक्की: आज शाम को कलेक्टर ने अधिकारियों के साथ छत्री पुल का दौरा किया। उन्होंने निगम अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि मुझे कुछ नहीं सुनना है मुझे तो काम चाहिए धूल किस प्रकार नहीं उड़े यह आपको देखना है मुझे धूल उड़ते हुए नहीं दिखना चाहिए। आपको डामर करना है डामर करो concreting करना है concreting करो कुछ भी करो त्योहारों का समय है जनता को परेशानी नहीं होना चाहिए और धूल नहीं उड़ना चाहिए यह आप की जवाबदारी और जिम्मेदारी है अगर धूल उड़ने की वजह से कोई घटना दुर्घटना होगी तो उसकी जवाबदारी आपकी होगी। देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आचार संहिता में कलेक्टर की बात को कितने गंभीरता से लेते हैं निगम अधिकारी। शांति समिति की मीटिंग में कई मर्तबा यह बात उठने के बावजूद भी और हर बार हामी भरने के बावजूद कलेक्टर की बातों को निगम अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया यही कारण है कि निगम की आपराधिक लापरवाही के कारण जनता को तकलीफ उठाना पड़ रही है । अब भी अगर निगम अधिकारियों ने कलेक्टर की बातों को गंभीरता से नहीं लिया तो निश्चित रूप से इस बार कलेक्टर कार्यवाही के लिए तैयार है। वैसे निगमायुक्त की अभी तक की कार्यशैली को देखते हुए लगता नहीं कि वह कलेक्टर की बातों को गंभीरता से लेगे। क्योंकि पिछले साल भी छत्री पुल गिरने के बाद भी निगमायुक्त ने कलेक्टर तन्वी सुन्द्रियाल की बातों को गम्भीरता से नही लिया था और पत्रकारों ने जनता को साथ लेकर पैदल मार्च निकाला था तब कलेक्टर ने निगमायुक्त को हड़काकर खुद खड़े रहकर 48 घण्टो में बायपास बनवाया था। खबर लिखे जाने तक निगम व जिला प्रशासन के कई अधिकारी छत्री पुल पर ही मौजूद थे।
