रतलाम। परम पूज्य संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागरजी के परम शिष्य,शंका समाधान के निष्पाण विद्वान, मुनि श्री 108 प्रमाण सागरजी ने वीरशासन जंयती के अवसर पर कहां है कि धर्म, परिवार, समाज और राष्ट्र की गरिमा को बनाए रखना, इन्हे सच्चे मन से अपनाना ही आज की जरुरत है। जो इनके गौरव और गरिमा का मान नही रखता है वो खण्डित हो जाता है।
दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना चातुर्मास समिति द्वारा लोकेन्द्र भवन में आयोजित चातुर्मास में रतलाम वासियों के लिए पुण्योदय का अवसर लेकर आए संत मुनि श्री 108 प्रमाण सागरजी ने प्रवचनमाला के दौरान भक्तों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि वीरशासन जंयती के पावन अवसर पर भगवान महावीर तीर्थकंर कहलाए थे। आज हमे जैन होने पर गर्व है, मगर जैनत्व की रक्षा और इस समाज का मान बढ़ाना सभी का दायित्व है। आज जरुरत है कि जैन धर्म के मर्म को सभी समझे। मुनिश्री नें कहां कि धर्म की गरिमा, इसका गौरव, इसके प्रति कृत्घ्यता रखना जरुरी है।
गुडविल और स्टेट्स का ध्यान रखे
मुनिश्री प्रमाणसागरजी अपने प्रवचन में कई उदाहरण देकर भी समाजजनों को अंहिसा के साधक भगवान महावीरजी के बताए मार्गो आदर्शो पर चलने की सीख दी है। उन्होने कहां कि आज के दौर में व्यक्ति, परिवार और खुद के स्टेट्स को बिगडऩे नही देता, मगर वो जिस समाज का है और जिस समाज से उसका मान है उसी समाज के स्टेट्स को भूल जाता है। ऐसे में जरुरी है कि भगवान महावीर के बताए रास्तों पर चल कर समाज और राष्ट्र का कल्याण करो।
सम्पन्नता के साथ संस्कार जरुरी है
रतलाम. मुनिश्री ने कहां कि आज हर कोई सम्पन्नता की और भाग रहा है, मगर इस दौड़ में संस्कार पीछे छूट गए है। आचरण चरित्र तेजी से बिखर रहे है। परिवार और समाज बिखर रहे है। ऐसे में सम्पन्नता के साथ संस्कारों को अपनाना जरुरी है, वरना कही के नही रह जाओंगे। जिस सम्पन्नता में संस्कारों का समावेश नही है वह समाज खण्डित हो जाता है। हम ऐसे प्रयास करे जिसमें संस्कारों का वास हो और यही संस्कार आपकी आने वाली पीढिया अक्षुण बनाएगी।
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मुनिराजों का पूजन विधि विधान से किया
चातुर्मास में पधारे मुनिराजों का पूजन विधि विधान से किया गया। इस अवसर पर मंगलाष्टक,अभिषेक.शांतिधारा पूजन, चित्र अनावरण, गुरुपाद प्रक्षालन और शास्त्रभेट के आयोजन हुए जिसमें विभिन्न जिनालयों, जैन मंदिरों. चेत्यालय, श्रावक संघ से जुड़े पदाधिकारियों, सदस्यों व महिला मंडलों ने विधि-विधान से गुरु पूजन कर मुनिराजों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर देशभर से जैन श्रृद्वालु उपस्थित रहे। यहां कानपुर, मुंबई, दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश सहित मध्यप्रदेश के विभिन्न नगरों से गुरुभक्तों का तांता लगा रहा।
