खबर पक्की, 21 अक्टूबर, रतलाम। सड़क निर्माण में देरी को लेकर महापौर प्रहलाद पटेल कमिश्नर अनिल भाना पर बिफर गए। रहवासियों और व्यापारियों के सामने महापौर ने नगर निगम के सिस्टम और इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नगर में 400 करोड़ रुपए के निर्माण कार्य उनकी मेहनत से जमीन पर उतरे हैं, सिस्टम के भरोसे नहीं। इस दौरान सड़क निर्माण की समयसीमा को लेकर भी जमकर हंगामा हुआ।
कमिश्नर ने 58 दिन में सड़क का काम पूरा करने की बात कही। जब रहवासियों और व्यापारियों ने लिखित आश्वासन मांगा, तो महापौर के मुताबिक कमिश्नर ने कहा कि तय समय में काम पूरा नहीं हुआ तो नौकरी छोड़ दूंगा। इसके बाद दोपहर करीब 1 बजे प्रदर्शन समाप्त हुआ।
कमिश्नर के पहुंचते ही महापौर ने नाराजगी जताते हुए कहा, “सीधी बात है कमिश्नर साहब, अगर इस नगर के अंदर मैं निर्माण कार्य की चिंता नहीं करूं, तो नगर निगम पूरी की पूरी लाशों का ढेर है, इसके अलावा कुछ नहीं। ना आपको चिंता, ना आपके इंजीनियरों को चिंता। सिस्टम लाचार है। सब नपुंसक हैं। मैं यहां जनता के सामने बोल रहा हूं, मैं यहां जनता का प्रतिनिधि हूं।
उन्होंने कहा कि आज शहर में 400 करोड़ रुपए के काम जमीन पर उतरे हैं, वे अधिकारियों के भरोसे नहीं हुए। इसके लिए उन्होंने खुद मेहनत की है। रात-रातभर फाइलें चलवाईं और काम पूरे कराने के लिए लगातार पीछे पड़े रहे।
महापौर ने कहा कि हर काम की समयसीमा होती है। सड़क निर्माण शुरू होने के साथ ही बोर्ड लगाकर टेंडर की शर्तें और काम पूरा करने की समयसीमा लिखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके सामने काम शुरू होने पर तीन महीने का समय दिया गया था। वह सिस्टम से मिली जानकारी के आधार पर ही जनता को जवाब देते हैं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।
58 दिन में सड़क नहीं बनी तो नौकरी छोड़ दूंगा: कमिश्नर
हंगामे के दौरान रहवासियों और व्यापारियों ने महापौर व कमिश्नर से सड़क निर्माण पूरा करने की लिखित समयसीमा मांगी। महापौर ने कमिश्नर से पूछा कि सड़क कितने दिन में बन जाएगी। इस पर कमिश्नर ने 58 दिन में काम पूरा करने की बात कही।
रहवासी और व्यापारी लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। महापौर के अनुसार, उन्होंने कमिश्नर से पूछा कि यदि 58 दिन में काम पूरा नहीं हुआ तो क्या करेंगे। इस पर कमिश्नर ने नौकरी छोडऩे की बात कही।
महापौर प्रहलाद पटेल ने भी कहा कि यदि ठेकेदार तिमन्ना तय समय में सड़क का काम पूरा नहीं करता है, तो वे ऐसी फाइल तैयार करवाएंगे कि ठेकेदार भविष्य में कहीं काम नहीं कर सके।
डामर के रेट बढऩे से सुस्त पड़ा काम
महापौर प्रहलाद पटेल ने सड़क निर्माण में देरी का कारण बताते हुए कहा कि ईरान युद्ध के कारण डामर के रेट में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे ठेकेदार काम करने में सुस्ती दिखा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह ठेकेदार की जिम्मेदारी है। यदि डामर के रेट कम हो जाते, तो क्या ठेकेदार नगर निगम से कम भुगतान लेते? महापौर ने कहा कि ठेकेदार तिमन्ना ने 58 दिन में काम पूरा नहीं किया, तो उसके खिलाफ ऐसी फाइल तैयार कराई जाएगी कि वह भविष्य में कहीं काम नहीं कर सके।
बोले- तीन साल में 400 करोड़ के काम जमीन पर उतारे
महापौर ने कहा कि वर्ष 1995 से 2026 तक रतलाम नगर निगम में उनकी परिषद ने तीन साल में 400 करोड़ रुपए के जितने काम जमीन पर उतारे हैं, उतने पहले किसी ने नहीं कराए। उन्होंने नगर निगम के सिस्टम को लाचार बताने के पीछे उदाहरण देते हुए कहा कि बिजली के पोल शिफ्ट करने के लिए मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (एमपीईबी) से एनओसी लेने की फाइल उज्जैन में पड़ी रहती है। अधिकारी उसका फॉलोअप नहीं लेते। जब वह पूछते हैं कि पोल शिफ्ट क्यों नहीं हुए, तब पता चलता है कि फाइल तीन महीने से मंजूरी के लिए उज्जैन में पड़ी है।
महापौर ने कहा कि फाइल पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई और उसका फॉलोअप क्यों नहीं लिया गया, यह सवाल उन्होंने कमिश्नर के सामने भी उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी सख्ती के कारण ही शहर में 400 करोड़ रुपए के काम जमीन पर उतरे हैं। डामर के रेट बढऩे और कुछ मामलों में कोर्ट में केस होने से भी काम प्रभावित हुए हैं।
रहवासियों ने रखीं ये मांगें
- फोरलेन का काम कब तक पूरा होगा, इसकी स्पष्ट समयसीमा तय कर लिखित रूप में जनता को जानकारी दी जाए।
- सड़क निर्माण से जुड़े सभी काम एक साथ कराए जाएं। जरूरत पडऩे पर 30 दिनों तक मार्ग बंद रखकर निर्माण कार्य पूरा किया जाए।
- पूर्व में हुई चर्चा के अनुसार बड़बड़ हनुमान मंदिर के समान डिवाइडर बनाया जाए। हाईटेंशन बिजली लाइनों की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्टता रखी जाए।
- डिवाइडर बनाने से पहले बिजली के पोल और पेड़ों की शिफ्टिंग, पानी की लाइन, सीवरेज लाइन और गैस लाइन सहित सभी जरूरी काम पूरे किए जाएं।
- नाले की नियमित सफाई कराई जाए, ताकि मच्छरों और बीमारियों की समस्या से राहत मिल सके।
- नगर निगम द्वारा जिन स्थानों पर पेड़ों को शिफ्ट किया गया है, उनकी सूची रहवासी संघ को दी जाए, ताकि संघ पेड़ों की नियमित सिंचाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी ले सके।
कमिश्नर बोले- तीन वजहों से हुई देरी
कमिश्नर अनिल भाना ने कहा कि डामर के रेट बढऩे के कारण सड़क निर्माण का काम देर से चल रहा है। उन्होंने जनता के बीच 58 दिन में काम पूरा करने की बात कही।
कमिश्नर के मुताबिक, तीन मुद्दों के कारण काम में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि देरी के लिए नगर निगम दोषी नहीं है। जनता ने काफी कुछ बर्दाश्त किया है और नगर निगम की भी कुछ मजबूरियां रही हैं। उन्होंने कोर्ट से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया।
