खबर पक्की, 26 अगस्त, रतलाम। ईद मिलादुन्नबी के जुलूस में बुधवार को बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, लेकिन भीड़ के बीच स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने और तेज ध्वनि पर नियंत्रण की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए।
जुलूस के दौरान वार्ड 47 के कांग्रेस पार्षद और सीरत कमेटी अध्यक्ष 64 वर्षीय नासिर कुरैशी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें आटो रिक्शा से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इसी दौरान जुलूस में तेज बेस के साथ साउंड सिस्टम लगातार बजते रहे। लोगों ने साउंड की तीव्रता को लेकर पुलिस को वीडियो भेजकर शिकायतें कीं। देर शाम पुलिस ने दस साउंड संचालकों के खिलाफ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए।
पार्षद अचानक गिरे, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत
सुबह करीब 8.30 बजे आबकारी चौराहे से जुलूस शुरू हुआ था। पार्षद नासिर कुरैशी भी पैदल जुलूस में शामिल थे। महलवाड़ा से सूरजपोर की ओर जाते समय उन्हें अचानक घबराहट हुई। उन्होंने सीने पर हाथ रखा और नीचे गिर गए। घटना से करीब एक मिनट पहले ही आरडीए अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, उपाध्यक्ष गोविंद काकानी और कांग्रेस नेत्री यास्मीन शैरानी ने उनका स्वागत किया था। इस दौरान काकानी ने तबीयत के बारे में पूछा तो कुरैशी ने बताया था कि वे दवाई साथ लेकर चल रहे हैं।
डॉक्टर सीपीएस राठौर ने बताया कि नासिर कुरैशी को अस्पताल लाए जाने तक उनकी मौत हो चुकी थी। उनके साथ आए लोगों के अनुसार वे साउंड सिस्टम के पास थे। विशेषज्ञ डा. संजय दुबे के अनुसार 90 डेसिबल से अधिक का शोर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है और बच्चों व बुजुर्गों पर इसका प्रभाव अधिक हो सकता है।
नियम में यह मानक
केंद्रीय ध्वनि प्रदूषण को लेकर तय नियम में सार्वजनिक स्थान पर लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम का शोर संबंधित क्षेत्र के एंबिएंट नाइज स्टैंडर्ड से अधिकतम 10 डेसिबल या 75 डेसिबल, इनमें जो कम हो, उससे अधिक नहीं होना चाहिए। आवासीय क्षेत्र के लिए एंबिएंट नाइज स्टैंडर्ड दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल है। रात में सामान्यत: रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर/पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है।
पुलिस जवानों ने कान, अधिकारियों ने वाहनों के शीशे बंद किए
कुरैशी की मौत की सूचना के बाद भी जुलूस समाप्त होने तक कई जगह साउंड सिस्टम तेज आवाज में बजते रहे। जुलूस मार्ग पर तैनात पुलिस जवानों को खुद कान बंद करते देखा गया। आरोप है कि इसके बावजूद तत्काल साउंड संचालकों को नहीं रोका गया। पुलिस और प्रशासन के कुछ अधिकारी भी तेज आवाज से बचने के लिए वाहनों के शीशे बंद कर बैठे नजर आए। जुलूस में करीब 15 से अधिक साउंड सिस्टम और बैंड शामिल होने की बात सामने आई। कई साउंड सिस्टम 100 से 200 मीटर की दूरी तक सुनाई दे रहे थे। महाराष्ट्र, इंदौर, उज्जैन और धार से भी साउंड सिस्टम बुक कराए जाने की जानकारी सामने आई।
लोगों ने स्मार्ट वाच से नापा शोर
जुलूस से पहले मंगलवार को डीआईजी निमिष अग्रवाल ने एसपी अमित कुमार के साथ जुलूस मार्ग का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। शांति समिति की बैठक में भी साउंड सिस्टम पर नियंत्रण को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बावजूद जुलूस के दौरान तेज आवाज को लेकर शिकायतें सामने आईं। इंटरनेट मीडिया पर लोगों ने व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। कुछ लोगों ने स्मार्टवाच से 117 तक का डेसिबल स्तर मापकर उसके वीडियो पुलिस को भेजे और तेज आवाज कम कराने की मांग की। जुलूस में शामिल कई लोग भी शोर से बचने के लिए कान बंद करते नजर आए। कुछ रहवासियों ने घरों में कांच के बर्तन गिरने तक की शिकायत पुलिस से की।
रूट डायवर्जन भी बेअसर, पांच से शाम तक जाम
जुलूस के कारण रूट डायवर्जन की व्यवस्था भी प्रभावी नहीं रही। सुबह करीब 10 बजे से शाम 5 बजे तक शहर के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित रहा और लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। ऐसे में जुलूस की भीड़, तेज साउंड और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठे।
शिकायतों के बाद देर शाम कार्रवाई
तेज आवाज को लेकर विरोध और शिकायतों के बाद पुलिस ने देर शाम दस साउंड संचालकों के खिलाफ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए। इसमें माणकचौक थाना अंतर्गत पांच, दीनदयाल नगर में एक व दो प्रक्रण स्टेशन रोड थाने पर दर्ज किए गए। तीन साउंड सिस्टम जब्त कर एक संचालक पर 20 हजार और दूसरे पर 10 हजार रुपए का जुर्माना किया गया। एएसपी विवेक कुमार ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर साउंड संचालकों की पहचान की जा रही है।
पुलिस के कान बंद, साउंड सिस्टम फुल, छह घंटे तक रतलाम शहर जाम, घरों के बर्तन गिरे, पार्षद की मौत, 10 पर केस
