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रतलाम में दूषित पानी का कहर… कुएं का पानी पीते ही 80 से ज्यादा बीमार, 21 अस्पताल में भर्ती; प्रशासन में हड़कंप

BySurendra Jain

Jul 17, 2026

खबर पक्की, 17 जुलाई, रतलाम। जिले की पिपलोदा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत अयाना के ग्राम आजमपुर डोडिया में कथित रूप से कुएं का दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गई। करीब 800 आबादी वाले इस गांव में 80 से अधिक लोगों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (क्क॥श्व) विभाग की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया।
गंभीर हालत वाले 21 ग्रामीणों को पिपलोदा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भर्ती मरीजों में 9 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल हैं। अन्य प्रभावित लोगों का उपचार गांव में लगाए गए अस्थायी चिकित्सा शिविर में किया गया।
तीन दिनों से सामने आ रहे थे बीमारी के लक्षण
ग्रामीणों के अनुसार पिछले तीन दिनों से गांव के कई लोगों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत हो रही थी। जैसे ही इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को मिली, बीएमओ डॉ. पवन पाटीदार ने तत्काल 108 एंबुलेंस गांव भेजी। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर चिकित्सा शिविर लगाया। शिविर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने करीब 80 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और आवश्यक दवाइयां वितरित कीं। स्वास्थ्य टीम ने घर-घर जाकर सर्वे भी किया ताकि अन्य संभावित मरीजों की पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
दूषित पानी की आशंका, जांच के लिए भेजे गए नमूने
प्राथमिक जानकारी के आधार पर ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि गांव के कुएं का पानी दूषित होने के कारण लोग बीमार पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल के लिए गांव के मीठे पानी वाले कुएं का ही उपयोग किया जाता है और उसी का पानी पीने के बाद लोगों में बीमारी के लक्षण दिखाई दिए। घटना के बाद पीएचई विभाग ने संबंधित कुएं के पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की एपिडेमियोलॉजिस्ट टीम ने भी प्रभावित ग्रामीणों की जांच कर स्थिति का आकलन किया। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
एहतियात के तौर पर कुआं सील, टैंकरों से पहुंचाया जा रहा पानी
घटना के बाद प्रशासन ने एहतियातन संबंधित कुएं को सील कर दिया है। फिलहाल गांव में पेयजल की व्यवस्था टैंकरों के माध्यम से की जा रही है ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जा सके।
पीएचई विभाग ने स्पष्ट किया है कि क्लोरीनेशन और पानी की जांच रिपोर्ट संतोषजनक आने के बाद ही कुएं के पानी के उपयोग की अनुमति दी जाएगी।
नल-जल योजना का पानी नहीं पीते ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार गांव में दो शासकीय कुएं हैं। इनमें से एक का पानी मीठा होने के कारण अधिकांश लोग पेयजल के लिए उसी पर निर्भर रहते हैं। उनका कहना है कि नल-जल योजना के तहत मिलने वाला पानी स्वादहीन होता है और उसकी आपूर्ति भी नियमित रूप से नहीं हो पाती, इसलिए ग्रामीण कुएं का पानी पीना अधिक पसंद करते हैं।
ग्राम सचिव प्रकाशचंद शर्मा ने बताया कि करीब एक माह पहले पीएचई विभाग ने कुएं के पानी की जांच कर उसे पीने योग्य बताया था। उन्होंने कहा कि कुएं की नियमित सफाई भी कराई जाती है। वर्तमान में गर्मी के कारण कुएं में पानी की आवक कम हो गई है।
दो दिन पहले निकाली गई थी कुएं की गाद
सरपंच समरथ ने बताया कि दो दिन पहले ही मोटर लगाकर कुएं का पानी खाली कराया गया था और उसकी गाद भी निकलवाई गई थी। उन्होंने कहा कि कुएं की पूरी तरह सफाई के लिए उसका पूरा पानी खाली करना आवश्यक होता है, लेकिन कई बार ग्रामीण इसका विरोध करते हैं।
तहसीलदार ने अस्पताल पहुंचकर लिया हालचाल
घटना की जानकारी मिलने पर पिपलोदा तहसीलदार प्रीति साठे सिविल अस्पताल पहुंचीं और भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को फिलहाल उबालकर पानी पीने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य विभाग और पीएचई विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पानी की जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे पानी उबालकर ही पिएं। पानी के नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी प्रभावितों का उपचार किया जा रहा है।

  • डॉ. गौरव बोरीवाल, एपिडेमियोलॉजिस्ट
    सूचना मिलते ही गांव में चिकित्सा शिविर लगाकर जांच और उपचार शुरू किया गया। सिविल अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की स्थिति सामान्य और स्थिर है।
    -बीएमओ डॉ. पवन पाटीदार
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