खबर पक्की, 26 मई, रतलाम। कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे नगरा के 65 वर्षीय किसान प्यार सिंह, पिता जुवान सिंह ने अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। हंगामा मचने पर मौजूद गार्ड ने तुरंत किसान के हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली। किसान का आरोप था कि रासायनिक दवा से उसकी फसल नष्ट हो गई है। वह तीन साल से जनसुनवाई में चक्कर काट रहा है, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला। जबकि अधिकारी खराब फसल को लैब में टेस्टिंग के लिए लेकर गए थे, उसकी रिपोर्ट भी आज तक नहीं आई। किसान ने रोते हुए कहा कि उसकी सुनने वाला कोई नहीं है।
जनसुनवाई में सुबह कलेक्टर मिशा सिंह, अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव व जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन समेत तमाम अधिकारी मौजूद थे। दोपहर में समय खत्म होने के बाद किसान प्यार सिंह पहुंचा। तब एडीएम भी उठकर जा रही थीं। इस दौरान एडीएम ने कहा कि चैंबर में आ जाओ।
एडीएम के निकलते ही किसान आत्महत्या की बात कहते हुए अपनी थैली से पेट्रोल की बोतल निकालकर अपने ऊपर छिड़कने लगा। हंगामा मचने पर दो होमगार्ड जवानों ने तुरंत किसान के हाथ से बोतल छीनी और उसे समझाया।
पेट्रोल छिड़कने के बाद किसान को होमगार्ड जवान अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव के चैंबर में लेकर गए। अपर कलेक्टर ने समस्या सुनी और कृषि अधिकारी को बुलाया।
किसान ने बताया कि वर्ष 2023 में उसने ग्रामोफोन कंपनी से रासायनिक दवाई खरीदी थी। उसके प्रयोग से उसकी लहसुन व प्याज की फसल नष्ट हो गई थी। इस संबंध में वह तीन साल से कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला।
किसान ने बताया कि शिकायत के बाद कृषि अधिकारी खराब फसल का सैंपल लेकर गए थे, लेकिन उसकी जांच रिपोर्ट आज तक नहीं आई। उसने उपभोक्ता फोरम में भी केस लगा रखा है, लेकिन वहां से लैब जांच रिपोर्ट मांगी जा रही है।
किसान का कहना था कि वह लैब टेस्ट रिपोर्ट को लेकर कई बार जनसुनवाई और कृषि अधिकारियों को आवेदन दे चुका है, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता।
किसान का कहना था कि उपभोक्ता फोरम ने कहा कि दोषी कंपनी ने उसकी फसल के टेस्ट के लिए लिए गए सैंपल खरीद लिए हैं। अब उसे हाई कोर्ट इंदौर जाना पड़ेगा, तभी उसे फसल का मुआवजा मिल सकेगा।
अपर कलेक्टर ने कृषि अधिकारी को बुलाकर जांच रिपोर्ट के बारे में पूछा, लेकिन उन्होंने किसी प्रकार की जांच से इनकार कर दिया।
किसान ने बताया कि उसके खेत पर फसल नष्ट होने के बाद जांच एवं मौका मुआयना करने के लिए डीडी साहब अजय चौरसिया, सैलाना के विषय विशेषज्ञ सोलंकी साहब, कृषि वैज्ञानिक कालुखेड़ा, वरिष्ठ उद्यान विस्तार अधिकारी विकासखंड रतलाम, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकासखंड रतलाम एवं अनुविभागीय अधिकारी कृषि अनुभाग सैलाना पहुंचे थे।
किसान का आरोप है कि अधिकारी उसके खेत से नष्ट हुई फसल के नमूने लेकर गए, लेकिन उन्हें दोषी कंपनी को बेच दिया। उनकी कोई जांच नहीं हुई।
किसान का कहना था कि उसने ढाई बीघा में लहसुन और दो बीघा में प्याज की फसल लगाई थी, लेकिन पूरी फसल खराब हो गई। आर्थिक तंगी के कारण उसकी जमीन बिक गई। ट्रैक्टर कंपनी वाले ट्रैक्टर भी ले गए। यहां आते-आते उसके जूते घिस गए। किसान ने कहा कि फसल नष्ट होने से उसे लाखों रुपए का नुकसान हुआ और वह कर्ज में डूब गया है।
किसान के साथ उसका बेटा जंगलसिंह, युवा कांग्रेस अध्यक्ष रतलाम ग्रामीण देवेंद्रसिंह सेजावता, भगवानसिंह, प्रद्युम्न सिंह (नगरा) और अनिल धाकड़ भी मौजूद थे।
जनसुनवाई खत्म होने के बाद आए-एडीएम
अपर कलेक्टर डॉ. शालीनी श्रीवास्तव ने बताया कि जनसुनवाई खत्म हो गई थी। अधिकारी सभी जा चुके थे। इसी बीच किसान आए। जोर-जोर से चिल्लाने लगे। उन्हें अपने चैंबर में आने को कहा। प्रकरण प्राकृतिक आपदा का नहीं है। इस कारण उस समय उन्हें राहत राशि की सुविधा नहीं मिली होगी। किसान ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर रखा है। वहां सुनवाई चल रही है। आगामी कार्रवाई वहीं से होना।
कलेक्ट्रेट में किसान ने खुद पर डाला पेट्रोल, रोते हुए कहा-कोई सुनने वाला नहीं; मुआवजे के लिए तीन साल से जनसुनवाई में आ रहा
