खबर पक्की, 25 मई, रतलाम। मध्यप्रदेश के रीवा में जैन साध्वियों को कार से कुचलने से मौत के बाद जैन समाज में आक्रोश है। रतलाम में श्री सकल जैन श्री संघ द्वारा कलेक्ट्रेट पहुंचकर जैन संतो के विहार के समय उनकी सुरक्षा की मांग की।
सीएम के नाम ज्ञापन अपर कलेक्टर डॉ, शालिनी श्रीवास्तव को सौंपा। इसके पहले जैन समाज के प्रमुखजनों ने संबोधित कर टक्कर मारने वाली घटना को सीधे जानबुझकर हत्या करना करार दिया। आरोपी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर संत सुरक्षा प्रोटोकाल लागू करने की मांग की।
सुबह 11 बजे सकल जैन श्री संघ के प्रमुखों एवं समग्र जैन समाज, हिंदू संगठन के पदाधिकारी, समाज प्रमुखजनों की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा गया।
सड़क दुर्घटना नहीं है हत्या है
ज्ञापन में विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक हाईवे एवं भीड़भाड़ क्षेत्रों में विशेष सावधानी रखने की मांग की गई। साथ ही विहार के समय रात्रि विश्राम के लिए शासकीय स्कूल एवं पंचायत भवन में साधु संतों को ठहरने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने भी मांग की।
ज्ञापन में बताया कि यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना भर नहीं मानी जा सकती। पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच अत्यन्त आवश्यक है। जैन साधु-संत पूर्णत: निहत्थे, अहिंसक एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते है। वे किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधाओं का उपयोग नहीं करते। समाज में शांति, संयम और अहिंसा का संदेश प्रसारित करते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं एवं हमले संपूर्ण समाज के लिए चिंताजनक विषय है।
यह रखी मांगे
- घटना की स्ढ्ढञ्ज अथवा न्यायिक जांच कराई जाए।
- घटना से संबंधित सभी ष्टष्टञ्जङ्क, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं।
- दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाई की जाए।
- यदि सुनियोजित कृत्य अथवा षड्यंत्र के तथ्य मिलें, तो कठोर धाराएं लगाई जाए।
- संत सुरक्षा प्रोटोकाल लागू किया जाए। राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाई जाए।
अशोक चौटाला, ओम अग्रवाल, प्रितेश गादिया, मणीलाल जैन, राजेश जैन, अजय बाकीवाला, कीर्ति बडज़ात्या, पारस सकलेचा, व्यापारी संघ के मनोज झालानी, संयुक्त हिंदू संगठन के पदाधिकारी अनिल बोहरा, नितीन लोढ़ा, राजेंद्र खाबिया, सुनील जैन, सुनील पारिख. फतेहलाल कोठारी, मांगीलाल जैन, हिम्मत गेलड़ा, प्रदीप छिपानी समेत बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं एवं पुरुष मौजूद रहे।
