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रतलाम कांग्रेस में इस्तीफों की आंधी, NSUI से जिला पंचायत तक हिला संगठन

BySurendra Jain

Dec 18, 2025
राजेश भरावा के इस्तीफे के बाद NSUI जिला अध्यक्ष राहुल शर्मा भी सक्रिय, संगठन में असंतोष बरकरार

राजेश भरावा के इस्तीफे के बाद NSUI जिला अध्यक्ष राहुल शर्मा भी सक्रिय, संगठन में असंतोष बरकरार


📍 रतलाम | जावरा

रतलाम कांग्रेस संगठन इन दिनों गंभीर अंदरूनी संकट से गुजर रहा है। जिला कांग्रेस में लगातार हो रहे इस्तीफों के बाद अब इसका असर छात्र संगठन NSUI तक साफ दिखाई देने लगा है। पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है और संगठनात्मक ढांचा सवालों के घेरे में है।

राजेश भरावा के इस्तीफे से बढ़ी हलचल-:

जिला पंचायत सदस्य एवं कांग्रेस नेता राजेश भरावा ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव और नीमच–मंदसौर प्रभारी पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। अपने त्यागपत्र में उन्होंने संगठनात्मक दबाव, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और क्षेत्र को पर्याप्त समय न दे पाने की बात कही है।

NSUI जिला अध्यक्ष राहुल शर्मा का पक्ष-:

इस पूरे घटनाक्रम पर NSUI जिला अध्यक्ष राहुल शर्मा ने कहा कि संगठन में छात्र हितों और जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज़ को मज़बूती से उठाना ज़रूरी है। उन्होंने माना कि हाल के दिनों में संगठनात्मक समन्वय की कमी रही है, लेकिन NSUI कार्यकर्ता अभी भी कांग्रेस की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़े हैं।

राहुल शर्मा ने यह भी कहा कि छात्र संगठन को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर संवाद और सक्रियता बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की नाराजगी या भ्रम को दूर किया जा सके।

NSUI में उभरती नाराजगी-:

हालांकि संगठन के भीतर यह चर्चा भी है कि कुछ निर्णयों में छात्र नेताओं से सलाह नहीं ली गई, जिससे असंतोष पनपा। NSUI से जुड़े कई कार्यकर्ता लंबे समय से नियुक्तियों और कार्यक्रमों में उपेक्षा की शिकायत कर रहे हैं।

कल की खबर से जुड़ती कड़ियां-:

कल रतलाम कांग्रेस जिला अध्यक्ष के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद आज राजेश भरावा का त्यागपत्र और NSUI में चल रही हलचल यह साफ संकेत देती है कि मामला सिर्फ एक पद या व्यक्ति तक सीमित नहीं है।

नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल-:

लगातार हो रहे इस्तीफों और छात्र संगठन में उभरते असंतोष पर अब तक कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते हालात नहीं संभाले गए, तो इसका असर संगठन और चुनावी रणनीति दोनों पर पड़ सकता है।

सियासी संदेश साफ-:

रतलाम कांग्रेस में मौजूदा हालात यह बता रहे हैं कि—

“संगठन में संवाद की कमी और कार्यकर्ताओं की अनदेखी अब संकट का कारण बन रही है।”

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