खबर पक्की : 29 अक्टूबर रतलाम, गुजराती स्कूल के सामने स्थित बालाजी होटल के मामले में कल रतलाम जिला नयायालय के द्वितीय जिला न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव ने स्पेसिफिक परफॉरमेंस सुट के दावे में एक बड़ा फैसला करते हुए वादी चंदू पिता टिल्लू मल शिवानी और रवि पिता वर्धमान डफरिया के मामले को खारिज करते हुए जितेंद्र पिता राम रतन राठौर, धर्मेंद्र पिता राम रतन राठौर, राम रतन पिता राधा कृष्ण राठौर एवं कंचन बाई पति राम रतन राठौर को बड़ी राहत प्रदान की है। पूरा मामला इस प्रकार है कि रवि डफरिया और चंदू शिवानी द्वारा 18 जुलाई 2019 को उक्त बालाजी होटल का सौदा होना बता कर 1 करोड़ 64 लाख नगद एवं 10 लाख रुपए चेक से भुगतान का अनुबंध प्रस्तुत कर स्पेसिफिक परफॉर्मेंस का सूट लगाया था। वादी के वकील ऋषि अग्रवाल ने बताया कि उक्त होटल का 6 करोड़ 96 लाख 47000 में वादी के द्वारा किया गया था और उसके पेटे एक करोड़ 74 लाख रुपए का भुगतान किया गया है और बाकी पैसे देने के लिए वादी तैयार है किंतु प्रतिवादी सौदे से मुकरते हुए रजिस्ट्री नहीं करवा रहा है इस हेतु यह बाद प्रस्तुत किया है। किंतु प्रतिवादी के वकील आलोक पुरोहित ने विभिन्न हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत को प्रस्तुत करते हुए अपने तर्कों से यह साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी की कि इस तरह का कोई सौदा कभी हुआ ही नहीं था महज आपसी लेनदेन और विश्वास का फायदा उठाकर वादी द्वारा उक्त कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत कर वाद दायर किया गया। न्यायालय विद्वान न्यायाधीश श्री आशीष श्रीवास्तव ने प्रतिवादी के वकील के तर्कों से सहमत होते हुए और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह निर्णीत किया की वादी अपना वाद प्रस्तुत करने में विफल रहा है और यह साबित नहीं कर पाया कि उसने एक करोड़ 74 लाख रुपए उक्त अनुबंध पेटे वास्तव में दिए थे। वादी द्वारा अनुबंध में मात्र 10 लाख रुपए चेक से देना बताए थे और एक करोड़ 64 लाख नगद देना बताए थे जिसको वह कोर्ट में साबित नहीं कर पाया। प्रतिवादी के वकील ने यह भी बताया कि आयकर अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत ₹200000 से अधिक का लेनदेन नगद में नहीं किया जा सकता इस तर्क से सहमत होते हुए कोर्ट द्वारा वादी द्वारा नगद भुगतान की बात की जांच और आगे की कार्रवाई हेतु आयकर विभाग को उक्त मामले में लेटर भेजा गया है। उक्त मामले में न्यायालय के निराकरण को देखते हुए नगर में आम चर्चा है कि चौबे जी छबबे जी बनने गए थे दुबे जी बन कर लौटे तो किसी ने टिप्पणी की कि माया मिली ना राम, एक ने तो यह कहा कि नमाज माफ कराने गए थे रोजे गले पड़ गए क्योंकि इस बहुत चर्चित मामले में 2024 में गैंगस्टर सुधाकर मराठा की भी एंट्री हुई थी जो मामला अभि लंबित है।

