खबर पक्की, 27 अक्टूबर, रतलाम। महिला अपराधों से संबंधित प्रकरणों में प्राय: प्रथम सूचना रिपोर्ट में समुचित धाराओं के अभाव, अनुसंधान की कमियों तथा अभियोजन कार्यवाही के दौरान साक्ष्य एवं साक्षियों के परीक्षण में बरती गई लापरवाही के कारण आरोपियों को संदेह का लाभ प्राप्त होता है, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालयों द्वारा दोषमुक्ति के निर्णय पारित किए जाते हैं।
इसी गंभीर विषय को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस उपमहानिरीक्षक रतलाम रेंज निमिष अग्रवाल के निर्देशन में रतलाम रेंज के तीनों जिलों — रतलाम, मंदसौर एवं नीमच के विवेचना अधिकारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण का द्वितीय सत्र का आयोजन दिनांक 27.10.2025 को नवीन पुलिस कंट्रोल रूम, रतलाम में किया गया। प्रथम सत्र का आयोजन दिनांक 06.10.25 को किया गया था।
आज द्वितीय प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत में पुलिस उपमहानिरीक्षक निमिष अग्रवाल एवं पुलिस अधीक्षक रतलाम श्री अमित कुमार द्वारा प्रशिक्षणार्थी विवेचकों को प्रशिक्षण का उद्देश्य समझाया गया तथा महिला अपराधों की विवेचना के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों एवं कानूनी बारीकियों पर विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश खाखा द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान पांच प्रमुख विषयों पर विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा व्याख्यान एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया—
1 सायबर अपराध एवं शिकायतों पर कार्यवाही — सायबर सेल प्रभारी प्रआर मनमोहन शर्मा, आरक्षक हिम्मत सिंह आर विपुल भावसार एवं मयंक व्यास द्वारा विवेचकों को मोबाइल, सोशल मीडिया एवं वित्तीय धोखाधड़ी जैसे सायबर अपराधों की जांच की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया।
साथ ही ष्टश्वढ्ढक्र पोर्टल, ष्टष्ठक्र विश्लेषण एवं डिजिटल साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया पर व्यावहारिक जानकारी दी।
2 नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधान — नगर पुलिस अधीक्षक श्री सत्येंद्र घनघोरिया एवं सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री योगेश तिवारी द्वारा भारतीय न्याय संहिता (क्चहृस्), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (क्चहृस्स्) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (क्चस््र) के प्रमुख प्रावधानों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
साथ ही विवेचना अधिकारियों को बताया कि नवीन कानूनों के अंतर्गत अपराध पंजीयन, गिरफ्तारी एवं साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया में क्या प्रमुख परिवर्तन हुए हैं।
3 महिला संबंधी अपराधों की विवेचना की प्रक्रिया — उप पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा) श्री अजय सारवान द्वारा। उन्होंने दहेज, घरेलू हिंसा, लैंगिक उत्पीडऩ, पॉक्सो एक्ट आदि प्रकरणों की विवेचना में संवेदनशीलता एवं कानूनी सटीकता पर विशेष बल दिया। साथ ही महिला पीडि़ताओं के बयान दर्ज करने, परामर्श एवं मेडिकल साक्ष्य संकलन के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों पर भी मार्गदर्शन दिया।
4 फॉरेंसिक साक्ष्य एवं वैज्ञानिक जांच की भूमिका — एफएसएल अधिकारी डॉ. अतुल मित्तल द्वारा।
उन्होंने विवेचना में भौतिक, जैविक एवं डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण और वैज्ञानिक विश्लेषण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। साथ ही यह बताया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट कैसे अभियोजन को सशक्त बनाती है और न्यायालय में साक्ष्य की विश्वसनीयता बढ़ाती है।
5 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अपराधों की विवेचना — जिला अभियोजन अधिकारी श्री गोल्डन रॉय द्वारा।
उन्होंने एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत तलाशी, जब्ती, सीलिंग एवं नमूना परीक्षण की कानूनी प्रक्रिया को विस्तार से बताया। साथ ही न्यायालय में अभियोजन प्रस्तुति के दौरान किन दस्तावेज़ों और गवाहियों का विशेष महत्व होता है, यह भी स्पष्ट किया।
इस प्रशिक्षण में रतलाम, मंदसौर एवं नीमच जिलों से 06 उप निरीक्षक, 06 सहायक उप निरीक्षक एवं 12 प्रधान आरक्षक सहित कुल 24 विवेचना अधिकारियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण सत्र के दौरान रक्षित निरीक्षक श्री मोहन भर्रावत, सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अंत में प्रशिक्षणार्थियों की समझ एवं अधिगम का मूल्यांकन करने हेतु एक टेस्ट भी लिया गया। टेस्ट में प्रथम स्थान एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया।
अपराधों की विवेचना में गुणवत्ता सुधार हेतु रतलाम रेंज में पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण
