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रतलाम पुलिस द्वारा ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत एक माह में 70 अपहृत/गुमशुदा बालक-बालिकाएं दस्तयाब कर परिजनों को लौटाई मुस्कान, वर्ष 2025 में अभी तक 383 बालिकाओं एवं 40 बालकों को खोजकर किया गया परिजनों के सुपुर्द

BySurendra Jain

Oct 8, 2025

खबर पक्की, 8 अक्टूबर, रतलाम। पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार एवं पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के कुशल मार्गदर्शन में रतलाम जिले में गुम एवं अपहृत बालक-बालिकाओं की दस्तयाबी हेतु ऑपरेशन मुस्कान अभियान चलाया जा रहा है।
जिले में घटित होने वाले नाबालिग बच्चों से संबंधित अपराधों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा सभी थाना प्रभारियों एवं अनुविभागीय अधिकारियों को विशेष रूप से गुमशुदा एवं अपहृत बालक-बालिकाओं की खोजबीन कर शीघ्र दस्तयाब करने के निर्देश प्रदान किए गए है।
इसी तारतम्य में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रतलाम (शहर) राकेश खाखा एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रतलाम (ग्रामीण) के मार्गदर्शन एवं सभी थाना प्रभारियों के नेतृत्व में वर्ष के दौरान जिले में विशेष अभियान चलाया गया।
अभियान के अंतर्गत सायबर सेल, जेएबी शाखा एवं थाना स्तर पर विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। परिजनों के कथन, तकनीकी जानकारी एवं मुखबिर तंत्र की सहायता से गुम/अपहृत बच्चों की तलाश की गई।
प्रदेश ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान एवं अन्य राज्यों से भी बच्चों को सुरक्षित दस्तयाब किया गया।
1 जनवरी से 30 सितम्बर तक की उपलब्धि, कुल 423 बालक बालिका सुरक्षित दस्तयाब किए गए। दस्तयाब किए गए बच्चों को विधिसम्मत कार्यवाही कर सुरक्षित परिजनों को सौंपा गया।
माहवार स्थिति

  • जुलाई माह में 03 बालक, 26 बालिका सहित कुल 29 बच्चों को दस्तियाब किया।
  • अगस्त माह में 02 बालक, 25 बालिका सहित कुल 27 बच्चों को दस्तियाब किया।
  • सितंबर माह में 6 बालक, 64 बालिका सहित कुल 70 बच्चों को दस्तियाब किया।
  • 1 जनवरी से अभी तक 40 बालकों एवं 383 बालिकाओं सहित कुल 423 अपहृत बालक / बालिकाओं को खोजा गया।
  • 1 जनवरी से 30 सितंबर तक 319 बालिकाओं के अपहरण के प्रकरण दर्ज हुए जबकि इस अवधि में 383 बालिकाओं को दस्तियाब किया गया। पूर्व से अपहृत बालिकाओं को खोजने हेतु भी विशेष प्रयास कर खोजने के प्रयास किए जा रहे है।
    रतलाम पुलिस की प्राथमिकता
  • बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण सुनिश्चित करना।
  • गुमशुदा या अपहृत बच्चों को शीघ्र खोजकर परिजनों से मिलाना।
  • समाज में बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता एवं विश्वास कायम करना।

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