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राजस्व अधिकारियों की हड़ताल शुरू : आपदा प्रबंधन को छोड़ कोई काम नहीं करेंगे; न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्य विभाजन का विरोध

BySurendra Jain

Aug 6, 2025

खबर पक्की, 6 अगस्त, रतलाम। राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर न्यायिक विभाजन को लेकर विरोध शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संगठन के आह्वान पर रतलाम जिले के सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। तहसीलदार और नायब तहसीलदार आपदा प्रबंधन को छोड़ अन्य कोई काम नहीं करेंगे। सभी ने अपना कामकाज बंद कर दिया है। अपने शासकीय वाहन भी जमा करा दिए है।
कलेक्ट्रेट परिसर में तहसीलदार व नायब तहसीलदार टेंट-तंबू के नीचे धरना देकर पर बैठ गए है। हड़ताल के पहले दिन जमकर नारेबाजी की। हड़ताल को राजस्व निरीक्षक, पटवारी संघ, अधिवक्ताओं ने भी समर्थन दिया। जिले के भर के सभी अधिकारी रतलाम में धरने में शामिल हुए।
हड़ताल के कारण विभागों व आम लोगों के कामकाज ठप हो गए हैं। धरना प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों ने अपनी आवाज बुलंद कर शासन की की नीति का विरोध किया। तहसीलदारों को कहना है कि जब तक सरकार दोहरी नीति वाला फैसला नहीं बदलेगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी। प्रदर्शन में नायब तहसीलदार आशीष उपाध्याय, मनोज चौहान, पटवारी संघ के लक्ष्मीनारायण पाटीदार, अधिवक्ता सतीश पुरोहित समेत जिले के सभी तहसीलदार व नायब तहसीलदार शामिल रहे।
यह काम होंगे प्रभावित
हड़ताल से आम जनता को काफी परेशानी होगी। राजस्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य रुक गए हैं। भूमि संबंधी विवाद, आय प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनने का काम भी बाधित हो गया है।
तहसीलदार बोले- विभाजनकारी नीति अव्यवहारिक
सैलाना प्रभारी तहसीलदार कूलभूषण शर्मा ने कहा कि राज्य शासन द्वारा वर्तमान में एक विभाजनकारी नीति बनाई है। जिसमें जो तहसीलदार संवर्ग है उसको न्यायिक व गैर न्यायिक कार्य को दो भागों में विभाजित कर दिया है। यह विभाजन पूरी तरह से अव्यवहारिक है। क्योंकि, ग्राउंड लेवल पर हम काम करते है। हमें मालूम है क्या समस्या आएगी। न्यायिक कार्य करने पर तहसीलदारों की कमी आ जाएगी। टप्पो को मर्ज करके तहसीलों में लगाया जाएगा। एक ही कोर्ट कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा- जब शासन की प्रमुख नीति कि हम सुविधाओं व सेवाओं का विकेंद्रीकरण करना चाहते है जो हमारी सेवाएं है वह ग्राउंड लेवल तक पहुंचना चाहते है। उल्टा ग्रामीणों को दूर-दूर तक आना पड़ेगा है। विभाजनकारी नीति पूरी तरह से अव्यवहारिक है।
राजस्व व्यवस्था में सुधार करना चाहता है तो हमको संसाधन दिया जाए। तकनीकी रूप से दक्ष ऑपरेटर दिया जाए। जब तक शासन अपनी नीति को वापस नहीं लेता है तो तब तक हड़ताल जारी रहेगी। कोई आपदा आती है तो हम अपने कर्तव्य पर जाएंगे।
ट्रेनिंग पर आए तहसीलदार कर रहे काम
हड़ताल में सभी तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को शामिल होना था। लेकिन रतलाम में परिवीक्षा अवधि में आए नायब तहसीलदार हड़ताल में शामिल नहीं हुए। बाजना तहसीलदार मनीष जैन ने कहा कि हमने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से लिखा है जो परिवीक्षा अवधि के नायब तहसीलदार है उन्हें इस पूरे प्रकरण में शामिल नहीं किया है। काम तो आहत होंगे प्रशासन ने ऑप्शनल व्यवस्था की है।

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